26.1 C
Delhi

आपकी भाषा आपका मंच -विश्वहिंदीजन

विश्वहिंदीजन में आप सभी का स्वागत है। विश्वहिंदीजन हिंदी भाषा सामग्री का विशाल संग्रह एवं शब्दकारों का अंतरराष्ट्रीय मंच है। यहाँ आप हिंदी भाषा में समस्त जानकारी एक जगह प्राप्त कर सकते हैं अर्थात यह हिंदी का जंक्शन है। यहाँ आप हिंदी भाषा, साहित्य के अतिरिक्त समस्त विषयों की सामग्री हिंदी में प्राप्त कर सकते हैं साथ ही हिंदी भाषा में अपने लेखन का निशुल्क प्रचार-प्रसार कर सकते हैं। इस मंच पर हिंदी की शब्दावली, हिंदी साहित्य कोश, हिंदी पाठ्यक्रम के साथ-साथ विभिन्न पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं का संकलन उपलब्ध है। आप मंच से जुड़कर इन संकलन कार्यों का हिस्सा हो सकते हैं साथ ही हिंदी में रचनाएँ, लेख स्वयं साझा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विश्वहिंदीजन सोशल नेटवर्किंग साइट भी है, जहां लोग हिंदी में अपने विचार साझा कर सकते हैं साथ ही अन्य लोगों से जुड़ सकते हैं।

विश्वहिंदीजन विशेष

संकलन: सूची

नवीन

साहित्य कोना

कविता

साहित्य
नवीन

कविता-सुशांत सुप्रिय

1. स्त्रियाँ हरी-भरी फ़सलों-सी प्रसन्न है उनकी देह मैदानों में बहते जल-सा अनुभवी है उनका जीवन पुरखों के गीतों-सी खनकती है उनकी हँसी रहस्यमयी नीहारिकाओं-सी आकर्षक हैं उनकी आँखें प्रकृति में ईश्वर-सा मौजूद है उनका मेहनती वजूद दुनिया से थोड़ा और जुड़ जाते हैं हम उनके ही कारण 2. वह अनपढ़ मजदूरनी उस अनपढ़ मजदूरनी के पास थे जीवन के अनुभव मेरे पास थी काग़ज़-क़लम की बैसाखी मैं उस पर कविता लिखना चाह रहा था जिसने रच डाला था पूरा महा-काव्य जीवन का सृष्टि के पवित्र ग्रंथ-सी थी वह जिसका पहला पन्ना खोल कर पढ़ रहा था मैं गेंहूँ की बालियों में भरा जीवन का रस थी वह और मैं जैसे आँगन में गिरा हुआ सूखा पत्ता उस कंदील की रोशनी से उधार लिया मैंने जीवन में उजाला उस दीये की लौ के सहारे पार की मैंने कविता की सड़क 3. आँकड़ा बन गया वह किसान सूनी आँखें ताकती रहीं पर नहीं आया वह आदमी बैलों को सानी-पानी देने दिशाएँ उदास बैठी रहीं पर नहीं आया वह आदमी सूखी धरती पर कुछ बूँद आँसू गिराने उड़ने को तत्पर रह गए हल में क़ैद देवदूत पर नहीं मिला उन्हें उस आदमी का निश्छल स्पर्श दुखी थी खेत की ढही हुई मेड़ दुखी थीं मुरझाई वनस्पतियाँ दुखी थे सूखे हुए बीज कि अब नहीं मिलेगी उन्हें उसके पसीने की गंध अभी तो बहुत जीवन बाक़ी था उनका -- आँकड़ा बन जाने वाले उस बदकिस्मत किसान की बड़ी होती बेटी बोली आँखें पोंछते सुशांत सुप्रिय A-5001 , गौड़ ग्रीन सिटी , वैभव खंड , इंदिरापुरम , गाजियाबाद – 201014 ( उ. प्र. ) मो : 8512070086 ई-मेल : sushant1968@gmail.com

एक उदास सिम्फ़नी

एक उदास सिम्फ़नी                                            ...

परिंदे : निर्मल वर्मा

परिंदे : निर्मल वर्मा अँधेरे गलियारे में चलते हुए लतिका ठिठक गयी। दीवार का सहारा लेकर उसने लैम्प की बत्ती बढ़ा दी। सीढ़ियों पर उसकी...

रानी केतकी की कहानी

रानी केतकी की कहानी: इंशा अल्ला खाँ 'इंशा' यह वह कहानी है कि जिसमें हिंदी छुट।और न किसी बोली का मेल है न पुट॥सिर झुकाकर...

कहानी

गज़ल

विमर्श-कोना

पुस्तक कोना

विचार-विमर्श
विमर्श

‘आधे-अधूरे’ नाटक यथार्थवादी रंगशिल्प का सफल उदाहरण है, इसे समझने से पहले हमें रंगशिल्प के बारे में समझ लेना आवश्यक है

पत्र- पत्रिका