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आपकी भाषा आपका मंच -विश्वहिंदीजन

विश्वहिंदीजन में आप सभी का स्वागत है। विश्वहिंदीजन हिंदी भाषा सामग्री का विशाल संग्रह एवं शब्दकारों का अंतरराष्ट्रीय मंच है। यहाँ आप हिंदी भाषा में समस्त जानकारी एक जगह प्राप्त कर सकते हैं अर्थात यह हिंदी का जंक्शन है। यहाँ आप हिंदी भाषा, साहित्य के अतिरिक्त समस्त विषयों की सामग्री हिंदी में प्राप्त कर सकते हैं साथ ही हिंदी भाषा में अपने लेखन का निशुल्क प्रचार-प्रसार कर सकते हैं। इस मंच पर हिंदी की शब्दावली, हिंदी साहित्य कोश, हिंदी पाठ्यक्रम के साथ-साथ विभिन्न पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं का संकलन उपलब्ध है। आप मंच से जुड़कर इन संकलन कार्यों का हिस्सा हो सकते हैं साथ ही हिंदी में रचनाएँ, लेख स्वयं साझा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विश्वहिंदीजन सोशल नेटवर्किंग साइट भी है, जहां लोग हिंदी में अपने विचार साझा कर सकते हैं साथ ही अन्य लोगों से जुड़ सकते हैं।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षक शिक्षा अपेक्षा, चुनौतियाँ एवं समाधान-डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता

इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है जो भारत की वर्तमान चनुौतियों, समस्याओं और भविष्य की ज़रूरतों की पूर्ति में सहायक होगा।

कलमवीर धर्मवीर भारती- डॉ. उपेंद्र कुमार ‘सत्यार्थी’

कुछ लेखक ऐसे होते हैं जो सबकुछ लिखकर भी किसी एक विधा में सिद्धहस्त नहीं हो पाते, तो कुछ लेखक बस एक ही विधा को साध पाते हैं या सिर्फ़ एक रचना से शोहरत हासिल कर लेते हैं. परन्तु, वैसे लेखक विरले होते हैं, जिनका सबकुछ अतिउत्तम हो, उत्कृष्ट हो, या हर रचना नई बुलंदियों को छूकर आए. कलमवीर धर्मवीर भारती का नाम ऐसे ही रचनाकरों की सूची में शामिल है, जहाँ से भी उनको देखिये, उनके साहित्यिक कद की ऊंचाई एक समान ही दिखाई पड़ती है. यही बात उनके पत्रकारीय लेखन में भी दिखाई पड़ेगी.

हरियाणवी लोक साहित्य में अंबेडकरवाद के प्रवर्तक महाशय छज्जूलाल सिलाणा- दीपक मेवाती

छज्जूलाल ने अपना संपूर्ण जीवन समाज की बुराइयों पर लिखते हुए आमजन के बीच बदलाव की बात करते हुए एवं अंबेडकरवाद का प्रचार-प्रसार करते हुए व्यतीत किया।

अनहक-राजासिंह

अनहक -राजासिंह आजकल मौसम काफी गीला, चिपचिपा और बासी हो रहा है.हर समय कुछ घुटा घुटा सा,हलके अँधेरे में घिरा कुछ रहस्मयी सा.कल रात देर तक...

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गज़ल

विमर्श-कोना

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विचार-विमर्श
विमर्श

स्वाधीनता के लिए जब जब आन्दोलन तेज़ हुआ तब तब हिन्दी की प्रगति का रथ भी तेज़ गति से आगे बढ़ा। हिन्दी राष्ट्रीय चेतना की प्रतीक बन गई। स्वाधीनता आन्दोलन का नेतृत्व जिन नेताओं के हाथों में था, उन्होंने यह पहचान लिया था कि विगत 600 - 700 वर्षों से हिन्दी सम्पूर्ण भारत की एकता का कारक रही है; यह संतों, फकीरों, व्यापारियों, तीर्थ यात्रियों, सैनिकों आदि के द्वारा देश के एक भाग से दूसरे भाग तक प्रयुक्त होती रही है।

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