Home साक्षात्कार चौथे सप्तक के कवि एवं पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि हिंदी उपन्यासकार स्वदेश भारती जी से बातचीत

चौथे सप्तक के कवि एवं पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि हिंदी उपन्यासकार स्वदेश भारती जी से बातचीत

चौथे सप्तक के कवि एवं पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि हिंदी उपन्यासकार स्वदेश भारती जी से बातचीत

चौथे सप्तक के कवि एवं पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि हिंदी उपन्यासकार स्वदेश भारती के साथ डॉ.पिंकी कुमारी बागमार (स्वयं) का साक्षात्कार

प्रश्न-.आपके लेखन की यात्रा कब प्रारम्भ हुई? आपके प्रेरणास्रोत कौन थे? और पहली रचना का कुछ अनुभव बताएं?

उत्तर. मेरे लेखन की यात्रा 1950 से प्रारम्भ हुई जब ग्यारह वर्ष का था | मेरे प्रेरणा श्रोत पंत,निराला,महादेवी,राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त तथा शेक्सपियर शेली,कीट्स ,हेमिंग्वे,वाल्ट व्हिटमैन आदि थे |

प्रारंभिक रचनाएँ शारदा प्रसाद उपाध्याय ‘शार्दूल’ के नाम से लिखता रहा | जूनियर हाईस्कूल बहोरिकपुर ,कुंडा ,प्रतापगड के कई अध्यापक मेरी रचनाएं क्लास में सुना करते तथा मुझे प्रोत्साहित करते |

1956 में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण ने स्वदेश भारती का नामकरण किया | इसी नाम से मैने साहित्य में बरण किया |

प्रश्न-.आपका पहला उपन्यास कब प्रकाशित हुआ? और इसकी रचना प्रक्रिया तथा इसके लेखन के समय के अनुभव को बताएं?

उत्तर. पहला उपन्यास ‘शवयात्रा’ 1969 में प्रकाशित हुआ| यह हिंदी का पहला उपन्यास है जो नक्सल-प्रवृतियों को दर्शाता है| इस उपन्यास को डॉ.प्रभाकर माचवे ,हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि ,साहित्यकार ने श्रेष्ठ उपन्यासों के समकथा माना | तथा हिंदी की सभी पत्र-पत्रिकाओं में 1969 से 1980-85 के बीच काफ़ी चर्चा हुई |

इसी वर्ष मेरा पहला कविता संकलन –‘इक्कीस सुबह’ और छपा | उसकी भी चर्चा लहर ,समीक्षा ,कल्पना ,आलोचना ,संप्रेषण ,दस्तावेज आदि तमाम सारी साहित्यिक पत्रिकाओं में हुई |

प्रश्न-मूलतः आपकी पहचान एक कवि के रूप में है और आप अज्ञेय द्वारा सम्पादित चौथा सप्तक के कवि हैं | कविता और उपन्यास में आपको कौन सी विधा प्रिय है और क्यों?

उत्तर-कविता लेखक के रूप में ही लगभग एक दशक 1965 से 1980 तक चर्चित रहा | 1979 में चौथा सप्तक प्रकाशित हुआ | अज्ञेय ने कई बार कई संदर्भो में कहा- मैं आपकी कविता का पाठक रहा हूँ |

मुझे चिंतन का मही सबसे अधिक पसंद है फिर चाहे वह काव्यात्मक हो अथवा कथात्मक | प्रतिदिन प्रात: काल कविता से साक्षात्कार करने का समय होता है | उपन्यास लेखन कई बैठकों में दिन-रात करता हूँ| मुझे काव्य विधा और कथा विधा दोनों पर काम करना अच्छा लगता है |

प्रश्न-.पश्चिम बंगाल के हिंदी उपन्यासकारों के योगदान को आप किस रूप में देखेंगे?

उत्तर-पश्चिम बंगाल में हिंदी के कई सुप्रतिष्ठित उपन्यास रहे हैं | फणीश्वर नाथ रेणु,मुद्राराक्षस ,राजेन्द्र यादव ,रमेश बक्षी ,मन्नू भंडारी आदि जिन्होंने उपन्यास विधा को बेहतर बनाया | नई नई कहानियां ,औपन्यासिक कृतियाँ ,साहित्य को दी | हिंदी का इतिहास कलकत्ता को दरकिनार नहीं कर सकता |

प्रश्न-.स्वयं के उपन्यास लेखन के शिल्प और भाव पक्ष को आप किस रूप में देखते हैं?

उत्तर- मेरे उपन्यास प्रेमचंद या अश्क ,रेणु तथा ग्रामीण परिवेश पर चिंतन लेखन करने वाले लेखकों से कुछ अलग तो है ऐसा आलोचक मानते हैं |

समसामयिक नई संवेदना और यथार्थ का सम्प्रेषण ,अत्याधुनिक भाव बोध ,उपन्यास लेखन का नया प्रयोग मेरे उपन्यासों में देखे जा सकते हैं | लेखको एकांगी नहीं होना चाहिए | उसके सामने दुनिया का विशाल श्रोत होता है | इसलिए केवल एक स्थान पर बैठकर उसके इर्द-गिर्द घूमना आधुनिकता से परे हैं |

प्रश्न-.शवयात्रा उपन्यास के लेखन के समय के अनुभव और इस उपन्यास की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए?

उत्तर- ‘शवयात्रा’ एक प्रतीक है

हम सभी जन्म से मृत्यु तक

प्रेम से घृणा तक

सुख हो या दुःख हो अपने शरीर को शव की तरह से अपने कंधे पर उठाए हुए चलते हैं | उग्रमानसिकता मनुष्य का आंशिक आवेश ही है ,कोई टिकाऊ उग्रता होती नहीं| शवयात्रा में नारी और पुरुष पात्र के प्रेम संबंधों की भी यही गति होती है | उग्र मानसिकता के कारण प्रेम एक छोटे शिशु की तरह विलखता है |

प्रश्न- नगरबधु उपन्यास के लेखन के समय के अनुभव और इस उपन्यास की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए?

उत्तर- ‘नगरवंधु’ उपन्यास में घटनाएँ स्वत: अपना रूप ग्रहण करती हैं | इस इपन्यास का नायक पत्रकार है और नायिका अभावों में पली अपने को नगर की रंग-बिरंगी दुनिया में असहाय छोड़ देती है | आज के अस्तित्व के सन्दर्भ में नारी का असहाय –करुणा को उजागर करना मेरे इस उपन्यास का मुख्य ध्येय रहा है |

महानगर की बहुतसारी विसंगतियों के बीच शरीर का उत्पीड़न अधिक उजागर हुआ है | घटनाओं को ‘टू एण्ड फ्रो’ घड़ी के पेन्डुलम की तरह व्यक्त किया गया है |

प्रश्न-. औरतनामा उपन्यास के लेखन के समय के अनुभव और इस उपन्यास की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए?

उत्तर-‘औरतनामा’ में मेरे जीवन का यथार्थ ,बोध झलकता है नक्सक प्रवृतियाँ ,राजनैतिक महत्वकांक्षाएँ जुझारू मानसिकता तथा सत्ता का विषैली आपाधापी से इस उपन्यास की कथा वस्तु को सर्जित करने का यत्न मात्र है | यह उपन्यास आज के जीवन की तमाम सारी प्रवृतियों को समेटते हुए जीवन के अस्तित्व के विघटन की यथार्थ कथा है |

और औरतनामा को वर्ष 1989 में उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान ,लखनऊ द्वारा प्रेमचंद सम्मान से नवाजा गया |

डॉ विद्यानिवास मिश्र ,अज्ञेय ,भगवतीचरण वर्मा ,रमेश बक्षी तथा बहुत सारे श्रेष्ठ रचनाकारों ने इस उपन्यास को प्रेमचंद परम्परा का मिल का पत्थर माना और हर तरह से मुझे प्रोत्साहित किया |

प्रश्न-. आरण्यक उपन्यास के लेखन के समय के अनुभव और इस उपन्यास की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए?

उत्तर- आरण्यक उपन्यास भी उग्र चेतना और असहिष्ण सत्ता की अराजकता को दर्शाता है | एक दुखी दलित नारी की यातना को उजागर करता है |

इस उपन्यास में आज के युवा मन की ऊँची उड़ाने और सत्ता की गैर जिम्मेदाराना प्रवृति की खुलकर अभिव्यक्ति ही इसकी कोशिश की है

प्रश्न-.समकालीन हिंदी उपन्यास के यथार्थबोध वैचारिक संघर्ष,नारी विमर्श,नक्सलवाद ,आदिवासियों की समस्याएं आदि को आप किस रूप में देखते हैं?

उत्तर-यही सारी समस्याएँ आज देश के बुद्धिजीवियों को चिंतित कर रही है | इस देश में राजनीति हमेशा समाज ,धर्म में विभाजन की रेखा खींचती रही | बुद्धिवादियों का खेमा दाएं-बाएं बंटता रहता | उसके पाँव के नीचे की जमीन खिसकती है | एक आतंक का बेहिसाब माहौल ने समाज को टूटने ,उत्पीड़न और असहाय अवस्था में ला कर खड़ा कर दिया है | नारी सामाजिक प्रतारणाओं के बीच आज भी शोषित है |

‘नक्सलवाद’ अपने रास्ते से भटक गया है | आदिवासी ,पिछले तबके का आदमी आज के माहौल में अकेलापन अनुभव कर रहा है | उसके संघर्ष की कहानी –अंतहीन है | देश टूट रहा है | बिखर रहा है |

प्रश्न-.आपके उपन्यास में एक लेखक या पात्र के रूप में किस स्तर तक उपस्थित है?

उत्तर – मैं अपने उपन्यासों में लेखक के रूप में कम,पात्र के रूप में अधिक उपस्थित हूँ | यूँ भी उपन्यास लेखक अपने को स्थितियों के बीच रख कर यदि नहीं सोचता तो नव्यतम भावोध से नीचे गिर जाता है | भारतीय उपन्यासों में नवचिंतन के साथ अध्यात्म का भी उल्लेख होना चाहिए | उपन्यासों के माध्यम से हम नए समाज की रचना कर सकते हैं |

प्रश्न-.आपके उपन्यासों में से किस पात्र ने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया है?

उत्तर- ‘औरतनामा’ तथा आरण्यक में नायक की मानसिकता से लेखकीय प्रभाव सर्जित होता है जिसमे अपने को उन तमाम स्थितियों में महसूस करता हूँ| उपन्यास लेखक की निजी आत्मकथा भी होती है |

साक्षात्कार की तारीख-17 अगस्त 2017 डॉ. पिंकी कुमारी बागमार (एम.ए ,बी.एड,पी-एच.डी )

केशरीपुत्र भवन ,म.न-453/376 .वार्ड-9,मलिंचा रोड,खड़गपुर

पिन-721301 ,जिला-पश्चिम मेदिनीपुर

Email-pinkibaghmar@gmail.com ,

Ph.no-9475004249

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