विश्वहिंदीजन कोश

जामुन का पेड़ । कृश्न चंदरआप यहाँ पढ़ेंगे1 जामुन का पेड़ । कृश्न चंदर1.1 Like this: रात को बड़े ज़ोर का झक्कड़ (आंधी) चला. सेक्रेटेरियट के लाॅन में जामुन का एक दरख़्त गिर पड़ा. सुबह जब माली ने देखा तो इसे मालूम पड़ा कि दरख़्त के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है. माली दौड़ा-दौड़ा चपरासी के पास […]
ठकुरी बाबा। रेखाचित्र। महादेवी वर्मा आप यहाँ पढ़ेंगे1 ठकुरी बाबा। रेखाचित्र। महादेवी वर्मा 1.1 Like this: भक्तिन को जब मैंने अपने कल्पवास संबंधी निश्चय की सूचना दी तब उसे विश्वास ही न हो सका। प्रतिदिन किस तरह पढ़ाने आऊँगी, कैसे लौटूँगी, ताँगेवाला क्या लेगा, मल्लाह क्या लेगा, मल्लाह कितना मांगेगा, आदि-आदि प्रश्नों की झड़ी लगाकर, उसने मेरी […]
परिचय आप यहाँ पढ़ेंगे1 परिचय 1.1 शैक्षणिक अनुभव और शैक्षणिक उपयोगिता की पुस्तकों का लेखन1.2 संपादन अनुभव1.3 संगोष्ठी का आयोजन1.4 पत्र-पत्रिकाओं तथा सेमिनारों में प्रस्तुत शोध आलेखों के कुछ उदाहरण1.5 पाठ्यक्रम में स्वीकृति1.6 प्रकाशन 1.7 संपादित पत्रिकाएँ1.8 सम्मान व पुरस्कार 1.9 पत्र-पत्रिकाओं तथा सेमिनारों में प्रस्तुत शोध आलेख 1.10 Like this: नाम-डॉ गंगा प्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ शिक्षा- एम ए,एम एड,पीएचडी […]
परिचय आप यहाँ पढ़ेंगे1 परिचय 2 प्रकाशित पुस्तकें :-3 प्रकाशनाधीन पुस्तकें3.1 सम्प्रति3.2 Like this: नाम – वीरेन्द्र परमार जन्म स्थान:- ग्राम + पोस्ट- जयमल डुमरी, जिला:- मुजफ्फरपुर(बिहार)-843107 जन्मतिथि:-10 मार्च 1962, शिक्षा:- एम.ए. (हिंदी),बी.एड.,नेट(यूजीसी),पीएच.डी., पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक,सांस्कृतिक, भाषिक,साहित्यिक पक्षों,राजभाषा,राष्ट्रभाषा,लोकसाहित्य आदि विषयों पर गंभीर लेखन प्रकाशित पुस्तकें :- 1. अरुणाचल का लोकजीवन(2003) 2.अरुणाचल के आदिवासी और उनका लोकसाहित्य(2009) […]
परिचय आप यहाँ पढ़ेंगे1 परिचय 1.1 मुख्य कृतियाँ1.2 डॉ॰ रामविलास शर्मा पर आधारित शोध कार्य1.3 Like this: डॉ॰ रामविलास शर्मा (१० अक्टूबर, १९१२- ३० मई, २०००) आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि थे। व्यवसाय से अंग्रेजी के प्रोफेसर, दिल से हिन्दी के प्रकांड पंडित और महान विचारक, ऋग्वेद और मार्क्स के अध्येता, कवि, आलोचक, […]
दुलाईवाली- बंगमहिलाआप यहाँ पढ़ेंगे1 दुलाईवाली- बंगमहिला1.1 Like this: काशी जी के दशाश्‍वमेध घाट पर स्‍नान करके एक मनुष्‍य बड़ी व्‍यग्रता के साथ गोदौलिया की तरफ आ रहा था। एक हाथ में एक मैली-सी तौलिया में लपेटी हुई भीगी धोती और दूसरे में सुरती की गोलियों की कई डिबियाँ और सुँघनी की एक पुड़िया थी। उस […]
नज़ीर अकबरावादी हिन्दी और उर्दू दोनों के महत्वपूर्ण कवि हैं । और ये हिन्दी साहित्य इतिहास के विभिन्न कालों की दृष्टि से रीतिकाल में आते हैं, परंतु बहु आयामी व्यक्तित्व काल विशेष की परिधि का अतिक्रमण करके सार्वकालिक बनता दिखाई पड़ता है । उनकी जन्म तिथि के विषय में आलोचकों में मतभेद है । कुछ […]
नाखून क्यों बढ़ते हैं? हजारी प्रसाद द्विवेदीआप यहाँ पढ़ेंगे1 नाखून क्यों बढ़ते हैं? हजारी प्रसाद द्विवेदी2 Like this: बच्‍चे कभी-कभी चक्‍कर में डाल देनेवाले प्रश्‍न कर बैठते हैं। अल्‍पज्ञ पिता बड़ा दयनीय जीव होता है। मेरी छोटी लड़की ने जब उस दिन पूछ दिया कि आदमी के नाखून क्‍यों बढ़ते हैं, तो मैं कुछ सोच […]
ब्रजभाषा का जन्म, विस्तार ,विकासआप यहाँ पढ़ेंगे1 ब्रजभाषा का जन्म, विस्तार ,विकास1.1 ब्रजभाषा काव्य 1.2 ब्रजभाषा का अन्य भाषाओं से सह अस्तित्व-1.2.1   ब्रजभाषा साहित्य व गद्य 1.3 Like this: भारतीय आर्य भाषाओं की परंपरा में विकसित होने वाली “ब्रजभाषा” शौरसेनी भाषा की कोख से जन्मी है | संस्कृत का प्रचलन कम होने पर प्राकृत व अपभ्रंश […]
“वर्ण–व्यवस्था  लगातार चोट करने वाले इस आन्दोलन ने भक्ति के द्वार सभी जातियों के लिए खोल दिया और ‘जात–पात पूछे ना कोई, हरि को भजै सो हरि का होई’, जैसा नारा देकर सभी को एक धरातल पर प्रतिष्ठित करने की वकालत की । आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार ‘प्रेमस्वरूप ईश्वर को सामने लाकर भक्त कवियों […]
भीष्म साहनी का जन्म ८ अगस्त,१९१५ रावलपिंडी में हुआ था | भीष्म साहनी बहुभाषी लेखक माने गए | भीष्म जी ने एक घटना को देखकर ‘नीली आंखे’ नामक पहली कहानी लिखी,जिसे अमृतराय के ‘हंस’ पत्रिका में छापी गई | भीष्म जी का साहित्य में पदार्पण यही से हुआ माना जाता है| एक सच्चा साहित्यकार कोई […]
भोलाराम का जीव हरिशंकर परसाई ऐसा कभी नहीं हुआ था. धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफ़ारिश के आधार पर स्वर्ग या नरक में निवास-स्थान ‘अलॉट’ करते आ रहे थे. पर ऐसा कभी नहीं हुआ था. सामने बैठे चित्रगुप्त बार-बार चश्मा पोंछ, बार-बार थूक से पन्ने पलट, रजिस्टर पर रजिस्टर देख रहे […]
मजदूरी और प्रेम : सरदार पूर्ण सिंहआप यहाँ पढ़ेंगे1 मजदूरी और प्रेम : सरदार पूर्ण सिंह1.1 Like this: हल चलाने वाले का जीवन हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं। हल चलाने वाले अपने शरीर का हवन किया करते हैं। खेत उनकी हवनशाला है। उनके हवनकुंड की ज्वाला […]
परिचय आप यहाँ पढ़ेंगे1 परिचय 1.1 रचनाएँ1.2 सहायक ग्रंथ 1.2.1 पुस्तक खरीदने हेतु 1.3 Like this: महादेवी वर्मा (२६ मार्च १९०७ — ११ सितंबर १९८७) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से थीं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना […]
पुष्टिमार्गीय भक्ति का दर्शन शुद्धादैतवाद है जो शंकाराचार्य के अद्वैतवाद के विरोध के फलस्वरूप आया। अद्वैतवाद जहां निर्गुण भक्ति का समर्थन करता है वहीं शुद्धाद्वैतवाद सगुण भक्ति का । पुष्टिमार्गीय भक्ति के आधारभूमि लिए शंकाराचार्य का अद्वैतवाद तो एक कारण बना ही, इसके अलावा तत्कालीन परिस्थितियां भी उतनी ही जिम्मेदार रहीं । इस भक्ति के […]