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‘अवगत’ अवार्ड 2021

अकादमिक/शोध/साहित्य के क्षेत्र में यदि आपने कार्य किया है, अर्थात उक्त संदर्भित क्षेत्र में आपके कोई भी प्रकाशन हुए हैं, तब आप इस ‘‘अवगत‘‘ अवार्ड 2021 हेतु पंजीयन कर सकते हैं।

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की शिक्षक, शिक्षा और शिक्षार्थी ही आधार-प्रदीप सिंह

क भारत श्रेष्ठ भारत अभियान मूलतः भारत के राज्यों के लिए है जिसमें प्रतिवर्ष एक राज्य किसी अन्य राज्य का चुनाव करेगा और उस राज्य की भाषा,इतिहास,संस्कृति,ज्ञान विज्ञान आदि को अपनाएगा और उसको पूरे देश के सामने बढ़ाएगा

‘वैकल्पिक विकास में जैविक कृषि की भूमिका’-आशीष कुमार

वैकल्पिक विकास में जैविक कृषि के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। जिस प्रकार से जैविक कृषि में रोजगार के नए-नए सृजन हो रहे है। जैविक कृषि में लागत कम तथा उत्पादन अधिक प्राप्त होता है।

अनूदित लातिन अमेरिकी कहानी-एक पीला फूल

दरअसल मुझे वह फूल बेहद सुंदर लगा और तब यह अहसास मुझ पर शिद्दत से हावी हुआ कि एक दिन मैं मर कर सदा के लिए ख़त्म हो जाने वाला था । वह फूल बेहद सुंदर था और भविष्य में आने वाले लोगों के लिए फूल हमेशा मौजूद होंगे और तभी मैं अनस्तित्व और नगण्यता के बारे में सब कुछ जान गया ।

अवधी लोकगीतों में वर्णित स्त्री समस्या का अध्ययन-अंशु यादव

अवधी लोकगीतों में स्त्रियों की अनेक समस्याओं का वर्णन मिलता हैं। जैसे- बाल विवाह की समस्या, कन्या भ्रूण हत्या की समस्या, दहेज़ प्रथा की समस्या, बेमेल विवाह की समस्या, सती प्रथा की समस्या, परदा प्रथा की समस्या, सतीत्व परीक्षा, गोदना की प्रथा, बंध्या स्त्री की समस्या और विधवा स्त्री की समस्या इत्यादि ।

अवधी सम्राट पं. बंशीधर शुक्ल को याद करते हुए-राहुल देव

शुक्ल जी लोकचेतना से संपृक्त एक राष्ट्रवादी कवि हैं | उन्हें मालूम है कि लोक से विमुख रहकर साहत्य रचने का कोई मतलब नहीं | उनका सम्पूर्ण साहित्य समाज को नई राह दिखाने वाला साबित हुआ | ऐसे रचनाकारों को साहित्य में आज उनका उचित स्थान न दिया जाना हिंदी साहित्य की कृतघ्नता ही कही जाएगी |

आदिवासी कथा साहित्य में स्त्री-लीना कुमारी मीना

सिन्हा, राजेन्द्र अवस्थी, शानी, मेहरुनिशा परवेज आदि लेखक-लेखिकाओं ने इस समाज को लेखनी का विषय बनाया| बंगला लेखिका महाश्वेता देवी के आदिवासी लेखन और उड़िया लेखक गोपीनाथ महंती ने आदिवासी लेखन के हिंदी अनुवादों से भी आदिवासी समाज की तरफ पाठक वर्ग का ध्यान खींचा,लेकिन आदिवासी समाज तथाकथित मुख्यधारा के साहित्य में हाशिये पर ही बना रहा|

आदिवासी विमर्श में समकालीन यात्रा साहित्य का अवदान-हेमंत कुमार

मकालीन यात्रा साहित्य में अपना विशेष योगदान देने वाले साहित्यकारों में से रामदरश मिश्र, विष्णु प्रभाकर, नरेश मेहता, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, असगर वजाहत, नासिरा शर्मा, अमृतलाल वेगड़, ओम थानवी, पुरुषोत्तम अग्रवाल, हरिराम मीणा आदि लोगों का नाम प्रमुखता के साथ लिया जा सकता है |

आधुनिक अवधी काव्य में व्यंग्य – डॉ. अरविंद कुमार

आधुनिक अवधी कवियों में वंशीधर शुक्ल ‘रमई काका’ गुरु प्रसाद सिंह ‘मृगेश’ राजेश दयालु ‘राजेश’ बल भद्र दीक्षित ‘पढ़ीस’ आद्या प्रसाद मिश्र ‘उन्मत्त’ द्वारिका प्रसाद मिश्र’ त्रिलोचन शास्त्री’, जुमई खॉ आजाद’ आद्याप्रसाद पीयूष’ जगदीश पीयूष’ सुशील सिद्धार्थ भारतेंदु मिश्र’ विशाल मूर्ति मिश्र’ विशाल’ निर्झर प्रताप गढ़ी’ दयाशंकर दीक्षित देहाती’ काका बैसवारी’ विकल गोंडवी’ लवकुश दीक्षित’ केदारनाथ मिश्र’ ‘‘चंचल’ अजमल सुल्तानपुरी’ सतीश आर्य’ अदम गोंडवी’ इत्यादि की सर्जनात्मक प्रतिभा ने अवधी को अभिव्यक्ति का नया अंदाज दिया है।

आलोचना की पुस्तकें

आप यहाँ आलोचना की पुस्तकें निशुल्क पढ़ सकते हैं।

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