वर्षों बाद उसकी याद आई
मेरी अधूरी इश्क मुझे किस मोड़ पर लाई

जिसे दिल से भूला दिया था
ना जाने क्यों लब पर उसका नाम आई

जिससे इश्क हुआ उससे बयां नहीं किया
मैंने भी इश्क की राह में खुद को गुमनाम किया

मत कर इश्क किशन इस मुक्कमल जहां से
जहाँ जख्म कांटों से नहीं, मिलते हैं खूबसूरत कलीयों से

मेरे मुक्कदर में उसका प्यार नहीं है
लगता है मेरी मुक्कदर मुझसे रूठ गई है
:कुमार किशन कीर्ति,बिहार

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