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 राज्य-हिंसा पर विचार: क्या भारत एक हिंसक राज्य है?-अम्बिकेश कुमार त्रिपाठी

राज्य-हिंसा पर विचार करने से पहले हम मुख्यरूप से हिंसा की तीन स्थितियों की कल्पना कर राज्य की भूमिका का स्थापन करने का प्रयास करते हैं। पहला,  कुछ व्यक्तियों का समूह उनके निवास-स्थल के   नजदीक   लग रहे परमाणु संयंत्र के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध कर रहा है ,  क्योंकि इस परमाणु संयंत्र से होने वाले   रेडियोएक्टिव खतरे उनके सुरक्षित जीवन-यापन के विरूद्ध गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। राज्य की पुलिस ने उस जनसमूह के खिलाफ लाठीचार्ज किया और लोग गंभीर रूप से घायल हो गए है।  दूसरा,  बहुसंख्यक वर्ग के लोग सांप्रदायिक उन्माद में अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ हथियार लेकर सड़कों पर उतर गए हैं और बड़ी मात्रा में अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों की हत्या कर रहे हैं और राज्य की मशीनरी अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करने में अनिच्छुक और उदासीन दिखाई पड़ रही है।  तीसरा,  राज्य में निवास करने वाले किसी खास वर्ग या जाति समूह को उनके मानवाधिकारों से योजनाबद्ध तरीके से वंचित किया जा रहा है तथा दैनिक जीवन की आधारभूत जरूरतों को उनकी पहुँच से दूर रखा जा रहा है

‘अवगत’ अवार्ड 2021

अकादमिक/शोध/साहित्य के क्षेत्र में यदि आपने कार्य किया है, अर्थात उक्त संदर्भित क्षेत्र में आपके कोई भी प्रकाशन हुए हैं, तब आप इस ‘‘अवगत‘‘ अवार्ड 2021 हेतु पंजीयन कर सकते हैं।

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की शिक्षक, शिक्षा और शिक्षार्थी ही आधार-प्रदीप सिंह

क भारत श्रेष्ठ भारत अभियान मूलतः भारत के राज्यों के लिए है जिसमें प्रतिवर्ष एक राज्य किसी अन्य राज्य का चुनाव करेगा और उस राज्य की भाषा,इतिहास,संस्कृति,ज्ञान विज्ञान आदि को अपनाएगा और उसको पूरे देश के सामने बढ़ाएगा

‘‘स्त्री-मुक्ति की राहें’’ सपने और हकीकत-डॉ. रामचन्द्र पाण्डेय

आज बाज़ारवाद ने भी स्त्रियों की स्वतंत्रता की आड़ में उसकी देह को अधिकतम लाभ देने वाली उपभोग की वस्तु बनाकर रख दिया है। एक ऐसा भयंकर षड्यंत्र चल रहा है जो स्त्री की देह तथा उसकी आत्मा का मूल्य लगाकर उन्हें अपनी हवस का शिकार बना रहा है तथा उनसे पूँजी का भी सृजन कर रहा है।

‘वैकल्पिक विकास में जैविक कृषि की भूमिका’-आशीष कुमार

वैकल्पिक विकास में जैविक कृषि के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। जिस प्रकार से जैविक कृषि में रोजगार के नए-नए सृजन हो रहे है। जैविक कृषि में लागत कम तथा उत्पादन अधिक प्राप्त होता है।

‘स्वप्न’ और ‘स्वप्नभंग’ के कथाकार: प्रभात रंजन – ध्रुव कुमार

प्रभात रंजन की कहानियों में जो घटनाएं हैं उनका कारण और उनका समय पहचानने के लिए ‘जानकीपुल’ कहानी का यह एक पैरा ही पर्याप्त है, ‘जब तक पक्की सड़क नहीं बनी थी मधुवन गांव के लोग बड़े संतोषपूर्वक रहते और नदी के उस पार के जीवन को शहर का जीवन मानते और अपने जीवन को ग्रामीण और बड़े संतोषपूर्वक अपना सुख-दुख जीते। कोलतार की उस पक्की सड़क ने उनके मन को उम्मीदों से भर दिया था। 

‘हिन्द स्वराज’ की पृष्ठभूमि- मृत्युंजय पाण्डेय

काल मार्क्स की प्रसिद्ध उक्ति है- “दार्शनिकों ने केवल विभिन्न रूपों में दुनिया की व्याख्या ही की है, लेकिन असली काम तो उसे बदलने का है।”1 पर गांधी ऐसे दार्शनिक हैं जिन्होंने दुनिया की व्याख्या करने के साथ ही उसे बदलने की कोशिश भी की। गांधी का सारा जीवन सामाजिक अन्याय, आर्थिक विषमता, शोषण, गरीबी और उंच-नीच के भेद-भाव को खत्म करने की कोशिश में बीत गया। “उन्होंने भारत की हजारों वर्ष की जिंदगी की धड़कन को, उसकी लय को, उसकी सोच और संस्कृति को, उसके सम्पूर्ण सारतत्व को बड़ी गहराई से आत्मसात् किया और अपने जीवन में उसी को मूर्त किया। उन्हें देखकर कहा जा सकता था कि यह आदमी ‘भारत’ है।”2

“कृषकदेव”, हमारी आन, बान शान

*किसान हमारी आन बान शान इनसे ही है सुरक्षित हिंदुस्तान* (शीर्षक) 'कृषक देव' हम सुरक्षित हैं जब तक तुम्हारा सरमाया है हर विपत्ति में हर मौसम में तुमने ही हमें बचाया है ! विश्व युद्ध काल ने दुनियाँ की आजीविका लूटी थी तुमसे हमारी उम्मीद उस हाल में भी न टूटी थी ! सन 1997 का वो दुर्गम दौर भी हमने देखा था बाहरी चमक दिखावा था बस नज़र का धोखा था ! दहाड़ते एशियाई शेर सभी मुँह के बल गिरे थे सब एक सरताज के आगे हाथ जोड़े खड़े थे ! तब तुमने हमें बचाया था तुमने ही पार लगाया था। इस कोरोना काल में जो दुरूह विपत्ति आयी है तुमने ही हम सबकी कश्ती फिर से पार लगाई है! जी-तोड़ मेहनत करके तुम पेट हमारा भरते हो कपास उगाकर खेतों में तुम तन को हमारे ढकते हो! अपने बेटों को देश पर निसंकोच न्यौछावर किया हमें सुरक्षित रखने को दुश्मनों की फ़ौज से लड़ते हो! अच्छी फसल हमें सौंपकर जो बचे वही खुद खाते हो ! हमें पूरी कपास देकर ख़ुद फटेहाल रह जाते हो ! तुम्हारी ताकत और हिम्मत को तहे दिल से नमन है कैसे बेटों के बलिदान पर चुपचाप अश्रु बहाते हो ! तुम थाती हो, सम्पति हो और गर्व हो हिंदुस्तान का पीढ़ियाँ शुक्र करेंगीं हरदम तुम्हारे हर बलिदान का !! ©'शशि' सर्वाधिकार सुरक्षित #जयकिसान #जयजवान #अनाजमंडी #देशभक्ति #सैनिक #देशप्रेम #हिंदुस्तान #सुरक्षितभारत

“वे, जो शोषित हैं”

।।वे, जो शोषित हैं।। देश था, इंसान था, परिवार था, सपने थे, भूख थी,मजदूरी थी,मजबूरी थी तो लौटा वह मजदूरी करके हमेशा की तरह पूर्ण श्रम और...

“वे, जो शोषित हैं”

।।वे, जो शोषित हैं।। देश था, इंसान था, परिवार था, सपने थे, भूख थी,मजदूरी थी,मजबूरी थी तो लौटा वह मजदूरी करके हमेशा की तरह पूर्ण श्रम और...

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