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ब्लॉग क्या है ? ब्लॉग एक तरह से डिजिटल डायरी है, जहां आप अपने विचार साझा कर सकते हैं। वर्तमान में गूगल ब्लॉगस्पॉट केरूप में गूगल यह सुविधा आपको देता है जहां आप अपने जीमेल एकाउंट से लॉगिन करके ब्लॉग बना सकते हैं। आज ब्लॉग केवल डायरी लेखन तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से पत्रिका प्रकाशन, डाटाबेस निर्माण,...
Google AdSense । गूगल एडसेंस क्या है आज के समय में ऑनलाइन पैसा कमाने के कई विकल्प हैं। आप थोड़ी तकनीकि जानकारी के साथ गूगल ब्लॉगस्पॉट एवं वेवसाइट पर विज्ञापन के माध्यम से पैसा कमा सकते हैं और इसमें आपकी सहायता करता है गूगल एडसेंस। ऐडसेन्स, गूगल इनकार्पोरेटेड द्वारा चलायी जा रही विज्ञापन उपलब्ध कराने की सेवा है। वेबसाइटों के...
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कीवर्ड क्या है ? कीवर्ड अनुसंधान एक अभ्यास खोज इंजन अनुकूलन (SEO) है जो पेशेवर वैकल्पिक खोज शब्दों को खोजने और अनुसंधान करने के लिए उपयोग करते हैं जो लोग समान विषय की तलाश में खोज इंजन में प्रवेश करते हैं। सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन प्रोफेशनल्स अतिरिक्त कीवर्ड्स पर रिसर्च करते हैं, जिसका इस्तेमाल वे सर्च इंजनों में बेहतर रैंकिंग हासिल करने...
अनेकार्थी शब्द ऐसे शब्द, जिनके अनेक अर्थ होते है, अनेकार्थी शब्द कहलाते है। दूसरे शब्दों में- जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, उन्हें ‘अनेकार्थी शब्द’ कहते है। अनेकार्थी का अर्थ है – एक से अधिक अर्थ देने वाला। यहाँ कुछ प्रमुख अनेकार्थी शब्द दिया जा रहा है। ( अ, उ ) अपवाद- कलंक, वह प्रचलित प्रसंग, जो नियम के विरुद्ध हो। अतिथि- मेहमान, साधु, यात्री, अपरिचित...
आदिकाल (650 ई०-1350 ई०) हिन्दी साहित्येतिहास के विभिन्न कालों के नामकरण का प्रथम श्रेय जार्ज ग्रियर्सन को है। हिन्दी साहित्येतिहास के आरंभिक काल के नामकरण का प्रश्न विवादास्पद है। इस काल को ग्रियर्सन ने ‘चरण काल’, मिश्र बंधु ने ‘प्रारंभिक काल’, महावीर प्रसाद द्विवेदी ने ‘बीज वपन काल’, शुक्ल ने ‘आदिकाल: वीर गाथाकाल’, राहुल सांकृत्यायन ने ‘सिद्ध- सामंत काल’,...
उच्चारण और वर्तनी उच्चारण और वर्तनी की परिभाषा उच्चारण- मुख से अक्षरों को बोलना उच्चारण कहलाता है। सभी वर्णो के लिए मुख में उच्चारण स्थान होते हैं। यदि वर्णों का उच्चारण शुद्ध न किया जाए, तो लिखने में भी अशुद्धियाँ हो जाती हैं, क्योंकि हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है। इसे जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा भी जाता है। वर्तनी- लिखने की रीति...
काल क्रिया के जिस रूप से कार्य करने या होने के समय का ज्ञान होता है उसे ‘काल’ कहते है। दूसरे शब्दों में- क्रिया के उस रूपान्तर को काल कहते है, जिससे उसके कार्य-व्यापर का समय और उसकी पूर्ण अथवा अपूर्ण अवस्था का बोध हो। जैसे- (1) बच्चे खेल रहे हैं। मैडम पढ़ा रही हैं। (2)बच्चे खेल रहे थे। मैडम पढ़ा रही थी। (3)बच्चे खेलेंगे। मैडम...
क्रिया(Verb) जिस शब्द से किसी काम का करना या होना समझा जाय, उसे क्रिया कहते है। जैसे- पढ़ना, खाना, पीना, जाना इत्यादि। ‘क्रिया’ का अर्थ होता है- करना। प्रत्येक भाषा के वाक्य में क्रिया का बहुत महत्त्व होता है। प्रत्येक वाक्य क्रिया से ही पूरा होता है। क्रिया किसी कार्य के करने या होने को दर्शाती है। क्रिया को करने वाला ‘कर्ता’...
छन्द वर्णो या मात्राओं के नियमित संख्या के विन्यास से यदि आहाद पैदा हो, तो उसे छंद कहते है। दूसरे शब्दो में-अक्षरों की संख्या एवं क्रम, मात्रागणना तथा यति-गति से सम्बद्ध विशिष्ट नियमों से नियोजित पद्यरचना ‘छन्द’ कहलाती है।  छंद शब्द ‘छद्’ धातु से बना है जिसका अर्थ है ‘आह्लादित करना’, ‘खुश करना।’छंद का दूसरा नाम पिंगल भी है। इसका कारण यह...
पर्यायवाची शब्द ‘पर्याय’ का अर्थ है- ‘समान’ तथा ‘वाची’ का अर्थ है- ‘बोले जाने वाले’ अर्थात जिन शब्दों का अर्थ एक जैसा होता है, उन्हें ‘पर्यायवाची शब्द’ कहते हैं। इसे हम ऐसे भी कह सकते है- जिन शब्दों के अर्थ में समानता हो, उन्हें ‘पर्यायवाची शब्द’ कहते है। दूसरे अर्थ में- समान अर्थवाले शब्दों को ‘पर्यायवाची शब्द’ या समानार्थक भी कहते है। जैसे- सूर्य, दिनकर,...

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कविता-सुशांत सुप्रिय

1. स्त्रियाँ हरी-भरी फ़सलों-सी प्रसन्न है उनकी देह मैदानों में बहते जल-सा अनुभवी है उनका जीवन पुरखों के गीतों-सी खनकती है उनकी हँसी रहस्यमयी नीहारिकाओं-सी आकर्षक हैं उनकी आँखें प्रकृति में ईश्वर-सा मौजूद है उनका मेहनती वजूद दुनिया से थोड़ा और जुड़ जाते हैं हम उनके ही कारण 2. वह अनपढ़ मजदूरनी उस अनपढ़ मजदूरनी के पास थे जीवन के अनुभव मेरे पास थी काग़ज़-क़लम की बैसाखी मैं उस पर कविता लिखना चाह रहा था जिसने रच डाला था पूरा महा-काव्य जीवन का सृष्टि के पवित्र ग्रंथ-सी थी वह जिसका पहला पन्ना खोल कर पढ़ रहा था मैं गेंहूँ की बालियों में भरा जीवन का रस थी वह और मैं जैसे आँगन में गिरा हुआ सूखा पत्ता उस कंदील की रोशनी से उधार लिया मैंने जीवन में उजाला उस दीये की लौ के सहारे पार की मैंने कविता की सड़क 3. आँकड़ा बन गया वह किसान सूनी आँखें ताकती रहीं पर नहीं आया वह आदमी बैलों को सानी-पानी देने दिशाएँ उदास बैठी रहीं पर नहीं आया वह आदमी सूखी धरती पर कुछ बूँद आँसू गिराने उड़ने को तत्पर रह गए हल में क़ैद देवदूत पर नहीं मिला उन्हें उस आदमी का निश्छल स्पर्श दुखी थी खेत की ढही हुई मेड़ दुखी थीं मुरझाई वनस्पतियाँ दुखी थे सूखे हुए बीज कि अब नहीं मिलेगी उन्हें उसके पसीने की गंध अभी तो बहुत जीवन बाक़ी था उनका -- आँकड़ा बन जाने वाले उस बदकिस्मत किसान की बड़ी होती बेटी बोली आँखें पोंछते सुशांत सुप्रिय A-5001 , गौड़ ग्रीन सिटी , वैभव खंड , इंदिरापुरम , गाजियाबाद – 201014 ( उ. प्र. ) मो : 8512070086 ई-मेल : sushant1968@gmail.com

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