शब्दखोज

रहस्यवाद - रहस्यवाद वह भावनात्मक अभिव्यक्ति है जिसमें कोई व्यक्ति या रचनाकार उस अलौकिक, परम, अव्यक्त सत्ता से अपने प्रेम को प्रकट करता है। वह उस अलौकिक तत्व में डूब जाना चाहता है और जब वह व्यक्ति इस चरम आनंद की अनुभूति करता है तो उसको बाह्य जगत में व्यक्त करने में उसे अत्यंत कठिनाई होती है। लौकिक भाषा व वस्तुएं उस आनंद को व्यक्त नहीं कर सकतीं। इसलिए उसे उस पारलौकिक आनंद को व्यक्त करने के लिए प्रतीकों का सहारा लेना पड़ता है, जो आम जनता के लिए रहस्य बन जाते हैं।
राष्ट्रवाद - राष्ट्रवाद अपने राज्यीय स्वरूप से लेकर वर्तमान राष्ट्रीय राज्य तक किसी न किसी रूप में संगठन अथवा व्यक्तियों को प्रभावित करता रहा है. फिर भी जिस राष्ट्रवाद के स्वरूप की हम आगे चर्चा करेंगे – वह आधुनिक युग की देन है. अंग्रेजी शब्द ‘NATION’ की उत्पत्ति लेटिन भाषा के ‘NESHIYON’ शब्द से हुई है. जो राष्ट्र शब्द को परिभाषित करती है. हालांकि प्रारंभिक समय में इसे एक भौगोलिक सीमा में रह रहे लोगों के रूप में परिभाषित किया गया था. इसके पीछे कारण यह रहा है कि देश विभिन्न राजा-रजवाड़ों में बँटा था. अपनी सीमा को प्रत्येक शासक एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करते हुए दिखाई पड़ते हैं. किंतु, ‘आधुनिक राष्ट्र’ के विषय में यह धारणा तर्क-संगत नहीं है. किसी राष्ट्र में राजनीतिक विचारधारा का तत्त्व समाहित रहता है. उसी के अनुसार राष्ट्र के अर्थ में भी परिवर्तन होता रहता है. जॉन स्टुअर्ट मिल ने राष्ट्र को परिभाषित करते हुए कहा है कि – “ राष्ट्र मनुष्य जाति का ऐसा भाग है जो एक-दुसरे के प्रति सहानुभूति से बँधा हुआ एक सरकार के अधीन रहने की प्रबल इच्छा रखता हो.” अर्थात् राष्ट्रीयता सामूहिक भावना को अभिव्यक्त करने का माध्यम है.