कोशिश करने वालों की हार नहीं होती: सोहन लाल द्विवेदी लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है मन का विश्वास रगों में साहस भरता है चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है Read More
Khichdi Viplava Dekha Hamne Nagarjun खिचड़ी विप्लव देखा हमने नागार्जुन तुम तो नहीं गईं थीं आग लगाने तुम तो नहीं गईं थीं आग लगाने तुम्हारे हाथ मे तो गीला चीथडा नहीं था. आँचल की ओट में तुमने तो हथगोले नहीं छिपा रखे थे. भूख वाला भड़काऊ पर्चा भी तो नहीं बाँट रही थी तुम, दातौन Read More
Geet-Farosh Bhawani Prasad Mishra गीत-फ़रोश: भवानी प्रसाद मिश्र कवि क़लम अपनी साध, और मन की बात बिलकुल ठीक कह एकाध ये कि तेरी-भर न हो तो कह, और बहते बने सादे ढंग से तो बह। जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख, और इसके बाद भी हमसे बड़ा तू दिख। चीज़ ऐसी दे Read More
Geetika Suryakant Tripathi Nirala गीतिका सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला 1. रँग गई पग-पग धन्य धरा रँग गई पग-पग धन्य धरा,--- हुई जग जगमग मनोहरा । वर्ण गन्ध धर, मधु मरन्द भर, तरु-उर की अरुणिमा तरुणतर खुली रूप - कलियों में पर भर स्तर स्तर सुपरिसरा । गूँज उठा पिक-पावन पंचम खग-कुल-कलरव मृदुल मनोरम, सुख के भय Read More
Gangrene Agyeya गैंग्रीन अज्ञेय दोपहर में उस सूने आँगन में पैर रखते ही मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो उस पर किसी शाप की छाया मँडरा रही हो, उसके वातावरण में कुछ ऐसा अकथ्य, अस्पृश्य, किन्तु फिर भी बोझिल और प्रकम्पमय और घना-सा फैल रहा था... मेरी आहट सुनते ही मालती बाहर निकली। मुझे देखकर, पहचानकर Read More
Gramya Sumitranandan Pant ग्राम्या सुमित्रानंदन पंत 1. स्वप्न पट ग्राम नहीं, वे ग्राम आज औ’ नगर न नगर जनाकर, मानव कर से निखिल प्रकृति जग संस्कृत, सार्थक, सुंदर। देश राष्ट्र वे नहीं, जीर्ण जग पतझर त्रास समापन, नील गगन है: हरित धरा: नव युग: नव मानव जीवन। आज मिट गए दैन्य दुःख, सब क्षुधा तृषा Read More
चक्रव्यूह कुँवर नारायण माध्यम वस्तु और वस्तु के बीच भाषा है जो हमें अलग करती है, मेरे और तुम्हारे बीच एक मौन है जो किसी अखंडता में हमको मिलाता है : एक दृष्टि है जो संसार से अलग असंख्य सपनों को झेलती है, एक असन्तुष्ट चेतना है जो आवेश में पागलों की तरह भाषा को Read More
Chief Ki Dawat -Bhisham Sahni चीफ़ की दावत- भीष्म साहनी शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा बनाए मुँह पर फैली हुई सुर्खी और पाउडर को मले और मिस्टर शामनाथ सिगरेट पर सिगरेट फूँकते हुए चीज़ों की फ़ेहरिस्त हाथ में थामे, एक Read More
Jangli Booti : Amrita Pritam (Punjabi Story) जंगली बूटी : अमृता प्रीतम (पंजाबी कहानी) अंगूरी, मेरे पड़ोसियों के पड़ोसियों के पड़ोसियों के घर, उनके बड़े ही पुराने नौकर की बिल्कुल नई बीवी है। एक तो नई इस बात से कि वह अपने पति की दूसरी बीवी है, सो उसका पति ‘दुहाजू’ हुआ। जू का मतलब Read More
जागो फिर एक बार । सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जागो फिर एक बार! प्यार जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार- जागो फिर एक बार! आँखे अलियों-सी किस मधु की गलियों में फँसी, बन्द कर पाँखें पी रही हैं मधु मौन अथवा सोयी कमल-कोरकों में?- बन्द हो रहा गुंजार- जागो फिर Read More
जामुन का पेड़ । कृश्न चंदर रात को बड़े ज़ोर का झक्कड़ (आंधी) चला. सेक्रेटेरियट के लाॅन में जामुन का एक दरख़्त गिर पड़ा. सुबह जब माली ने देखा तो इसे मालूम पड़ा कि दरख़्त के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है. माली दौड़ा-दौड़ा चपरासी के पास गया. चपरासी दौड़ा-दौड़ा क्लर्क के पास गया. क्लर्क दौड़ा-दौड़ा सुपरिटेंडेंट Read More
Jamun Ka Ped Krishen Chander जामुन का पेड़- कृष्ण चंदर रात को बड़े जोर का अंधड़ चला। सेक्रेटेरिएट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पडा। सुबह जब माली ने देखा तो उसे मालूम हुआ कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है। माली दौड़ा दौड़ा चपरासी के पास गया, चपरासी दौड़ा दौड़ा Read More
Jindagi Aur Jonk : Amarkant ज़िन्दगी और जोंक : अमरकांत मुहल्ले में जिस दिन उसका आगमन हुआ, सबेरे तरकारी लाने के लिए बाज़ार जाते समय मैंने उसको देखा था। शिवनाथ बाबू के घर के सामने, सड़क की दूसरी ओर स्थित खँडहर में, नीम के पेड़ के नीचे, एक दुबला-पतला काला आदमी, गन्दी लुंगी में लिपटा Read More
जुही की कली । सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' विजन-वन-वल्लरी पर सोती थी सुहाग-भरी--स्नेह-स्वप्न-मग्न-- अमल-कोमल-तनु तरुणी--जुही की कली, दृग बन्द किये, शिथिल--पत्रांक में, वासन्ती निशा थी; विरह-विधुर-प्रिया-संग छोड़ किसी दूर देश में था पवन जिसे कहते हैं मलयानिल। आयी याद बिछुड़न से मिलन की वह मधुर बात, आयी याद चाँदनी की धुली हुई आधी रात, आयी याद Read More
Jharna Jaishankar Prasad झरना जयशंकर प्रसाद 1. परिचय उषा का प्राची में अभ्यास, सरोरुह का सर बीच विकास॥ कौन परिचय? था क्या सम्बन्ध? गगन मंडल में अरुण विलास॥ रहे रजनी मे कहाँ मिलिन्द? सरोवर बीच खिला अरविन्द। कौन परिचय? था क्या सम्बन्ध? मधुर मधुमय मोहन मकरन्द॥ प्रफुल्लित मानस बीच सरोज, मलय से अनिल चला कर Read More
ठकुरी बाबा। रेखाचित्र। महादेवी वर्मा भक्तिन को जब मैंने अपने कल्पवास संबंधी निश्चय की सूचना दी तब उसे विश्वास ही न हो सका। प्रतिदिन किस तरह पढ़ाने आऊँगी, कैसे लौटूँगी, ताँगेवाला क्या लेगा, मल्लाह क्या लेगा, मल्लाह कितना मांगेगा, आदि-आदि प्रश्नों की झड़ी लगाकर, उसने मेरी अदूरदर्शिता प्रमाणित करने का प्रयत्न किया। मेरे संकल्प के विरुद्ध बोलना Read More
Thanda Loha Dharamvir Bharati ठण्डा लोहा तथा अन्य कविताएँ धर्मवीर भारती 1. ठण्डा लोहा ठंडा लोहा! ठंडा लोहा! ठंडा लोहा! मेरी दुखती हुई रगों पर ठंडा लोहा! मेरी स्वप्न भरी पलकों पर मेरे गीत भरे होठों पर मेरी दर्द भरी आत्मा पर स्वप्न नहीं अब गीत नहीं अब दर्द नहीं अब एक पर्त ठंडे लोहे Read More
ठेस- फणीश्वरनाथ रेणु Thes Phanishwar Nath Renu खेती-बारी के समय, गाँव के किसान सिरचन की गिनती नहीं करते। लोग उसको बेकार ही नहीं, 'बेगार' समझते हैं। इसलिए, खेत-खलिहान की मजदूरी के लिए कोई नहीं बुलाने जाता है सिरचन को। क्या होगा, उसको बुला कर? दूसरे मजदूर खेत पहुँच कर एक-तिहाई काम कर चुकेंगे, तब कहीं Read More
डिप्टी-कलक्टरी : अमरकांत Deputy-Collectory : Amarkant शकलदीप बाबू कहीं एक घंटे बाद वापस लौटे। घर में प्रवेश करने के पूर्व उन्होंने ओसारे के कमरे में झाँका, कोई भी मुवक्किल नहीं था और मुहर्रिर साहब भी गायब थे। वह भीतर चले गए और अपने कमरे के सामने ओसारे में खड़े होकर बंदर की भाँति आँखे मलका-मलकाकर Read More
परिचय नाम-डॉ गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' शिक्षा- एम ए,एम एड,पीएचडी (हिंदी) जन्म तिथि- 1 नवंबर सन् 1962ई ग्राम -समशेर नगर,पत्रालय-बहादुर गंज,जनपद -सीतापुर माध्यमिक शिक्षा -महमूदाबाद (अवध)से उच्च शिक्षा -लखनऊ विश्व विद्यालय,लखनऊ शैक्षणिक अनुभव और शैक्षणिक उपयोगिता की पुस्तकों का लेखन 30 वर्षों से अधिक का अध्यापन अनुभव अधिकतर हिंदीतर भाषी और विदेशी विद्यार्थियों को हिंदी Read More