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साहित्य

हिंदी रिपोर्ताज साहित्य और कन्हैयालाल मिश्र का ‘क्षण बोले कण मुस्काए’

रिपोर्ताज साहित्य की गणना हिंदी गद्य की नव्यतम विधाओं में की जाती है. द्वितीय विश्वयुद्ध के आसपास इस विधा का जन्म हुआ. रिपोर्ताज शब्द को अपने विदेशी (फ्रेंच) रूप में ही ज्यों का त्यों हिंदी में अपना लिया गया

कहानी-ज्यों चकमक में आग: शिवानी

कहानी- गैंदी की पनीली आँखों में हृदय में संचित स्मृतियों की परछाइयाँ चहल-कदमी करने लगीं। बंद आँखों के आगे कुछ मंज़र घूम रहे थे।

कवि केदारनाथ अग्रवाल की कविताओं में प्रकृति-बोध का आधुनिक सन्दर्भ

कवि केदारनाथ अग्रवाल का प्रगतिशील कवियों में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। उनकी कविता ग्रामीण परिवेश एवं जनजीवन को मानवीय आधार प्रदान करती नज़र आती है।

बेबसी

कविता शीर्षक: बेबसी

हिन्दी साहित्येतिहास की समस्याएँ

इतिहासबोध की परंपरा में सक्रिय परिवर्तन शुक्ल जी ने ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में प्रत्यक्षवादी या विधेयवादी दृष्टिकोण से किया।

हिन्दी यात्रा-वृत्तान्त और समाज: डॉ. मुकुल रंजन झा

दुनिया आज जहां खड़ी है उनमें विभिन्न विषयों व क्षेत्रों पर केन्द्रित यात्रा वृतान्त हमारे ज्ञान बर्द्धन और सामाजिक विकास के लिए धुरी का काम करती हैं। विभिन्न विषयों व क्षेत्रों की तरह ही साहित्य में भी यात्रा वृतान्त एक महत्वपूर्ण विधा के रुप में स्थापित हैं।

हिंदी लघुकथा का समकालीन परिदृश्य वाया कमल चोपड़ा-चेतन विष्णु रवेलिया

हिंदी साहित्य में सर्वथा नवीन कथा विधा लघुकथा रूप रचना की दृष्टी से है तो अदनी सी लेकिन अपने सूक्ष्म और प्रभावकारी कथ्यों, सीमित किंतु सटीक शब्दों, सारगर्भितता, प्रभावी और तीक्ष्ण संवादों के कारण आज साहित्य के केंद्र में आ गई है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षक शिक्षा अपेक्षा, चुनौतियाँ एवं समाधान-डॉ. दिनेश कुमार गुप्ता

इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है जो भारत की वर्तमान चनुौतियों, समस्याओं और भविष्य की ज़रूरतों की पूर्ति में सहायक होगा।

कलमवीर धर्मवीर भारती- डॉ. उपेंद्र कुमार ‘सत्यार्थी’

कुछ लेखक ऐसे होते हैं जो सबकुछ लिखकर भी किसी एक विधा में सिद्धहस्त नहीं हो पाते, तो कुछ लेखक बस एक ही विधा को साध पाते हैं या सिर्फ़ एक रचना से शोहरत हासिल कर लेते हैं. परन्तु, वैसे लेखक विरले होते हैं, जिनका सबकुछ अतिउत्तम हो, उत्कृष्ट हो, या हर रचना नई बुलंदियों को छूकर आए. कलमवीर धर्मवीर भारती का नाम ऐसे ही रचनाकरों की सूची में शामिल है, जहाँ से भी उनको देखिये, उनके साहित्यिक कद की ऊंचाई एक समान ही दिखाई पड़ती है. यही बात उनके पत्रकारीय लेखन में भी दिखाई पड़ेगी.

हरियाणवी लोक साहित्य में अंबेडकरवाद के प्रवर्तक महाशय छज्जूलाल सिलाणा- दीपक मेवाती

छज्जूलाल ने अपना संपूर्ण जीवन समाज की बुराइयों पर लिखते हुए आमजन के बीच बदलाव की बात करते हुए एवं अंबेडकरवाद का प्रचार-प्रसार करते हुए व्यतीत किया।

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