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सबाल्टर्न -

सामान्य व्यवहार में ‘सबाल्टर्न’ शब्द का प्रयोग फौज में अधीनस्थ अधिकारियों के लिए किया जा रहा है। अकादमिक रूप से इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग इटली के मार्क्सवादी विचारक अंतोनियो ग्राम्शी ने किया था। ‘सबाल्टर्न’ का शाब्दिक अर्थ अधीनस्थ, मातहत, उपेक्षित, निम्नवर्गीय आदि होता है।‘सबाल्टर्न’ पर विचार करने से पहले ग्राम्शी के ‘हेजेमनी’ (प्रभुत्व) के सिद्धांत पर विचार करना आवश्यक है। ग्राम्शी यह कहते हैं कि वर्गीय समाज के गठन के समय से ही शासक वर्ग हमेशा अल्पमत में रहा है लेकिन अपने वैचारिक एवं सांस्कृतिक प्रभुत्व के कारण वह बहुसंख्यक शासित जनता पर शासन करने में सफल रहा है। इस वैचारिक एवं सांस्कृतिक प्रभुत्व को चुनौती दिए बगैर वैकल्पिक समाज के निर्माण की लड़ाई असंभव है। ग्राम्शी यह कहते हैं कि ‘हेजेमनी’ के निर्माण के लिए शासक वर्ग इतिहास, विचारधारा, संस्कृति, भाषा, परंपरा आदि का सहारा लेता है। इससे अधीनस्थ वर्ग यानी सबाल्टर्न शासक वर्ग के नियंत्रण में रहते हैं। ग्राम्शी सबाल्टर्न के शोषण को आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में देखते हैं। ग्राम्शी का ‘सबाल्टर्न’ को एकरूप वर्ग के रूप में नहीं देखते हैं। ग्राम्शी ‘सबाल्टर्न’ को हाशिये पर खड़े तमाम छोटी-बड़ी अस्मिताओं के रूप में देखते हैं, जिन्हें इतिहास में जगह नहीं मिली है। ‘सबाल्टर्न’ दृष्टि ऐसे समुदायों और वर्गों के इतिहास लेखन पर बल देती है, जिनका अब तक इतिहास में कहीं जिक्र नहीं हुआ था या गलत रूप में चित्रण हुआ था। अर्थात् “सबाल्टर्न इतिहास दृष्टि प्रत्येक देश, भाषा, धर्म, समुदायों के उप-वर्गों को चिह्नित करती है।” संक्षेप में ‘सबाल्टर्न’ दृष्टि दलित, आदिवासी, स्त्री, प्रवासी, अल्पसंख्यक आदि की अस्मिता को इतिहास एवं संस्कृति के माध्यम से स्थापित करता है। यानी ‘सबाल्टर्न’ दृष्टि के केंद्र में वे हैं – जिन्होंने अभी तक बोला नहीं है अर्थात् अपनी पहचान या अस्मिता का दावा नहीं किया था।

संस्कृति - संस्कृति शब्द ‘कृ’ धातु में ‘सम’ उपसर्ग और ‘क्रिन’ प्रत्यय लगाने से बना  है | ‘कृति’ का अर्थ है मनुष्य का किया हुआ कार्य, व्यवहार अथवा आचार | संस्कृति का अर्थ है अच्छी स्थिति, सुधारना-संवारना, शोधन करना आदि | अंग्रेज़ी में इसे ‘कल्चर’ कहा जाता है | संस्कृति शब्द ‘संस्कार’ से बना है | अत : संस्कृति का अर्थ हुआ विभिन्न संस्कारों द्वारा सामूहिक जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति मैकाइवर और पेज ने संस्कृति की परिभाषा इस प्रकार दी है – “संस्कृति हमारे दैनिक व्यवहार में, कला में, साहित्य में, धर्म में, मनोरंजन और आनंद में पाए जाने वाले रहन-सहन और विचार के तरीकों में हमारी प्रकृति की अभिव्यक्ति     है |

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