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आदिवासी दर्शन - आदिवासियों के जीवन व समाज से संबंधित प्रत्येक विशेषता, परम्पराएँ जैसे-प्रकृति के सान्निध्य में रहना, मानवेतर प्राणाी जगत के साथ सह-अस्तित्व, अपने आप में खुलापन, सामूहिकता, सहभागिता, आदिवासी संस्कृति, जीवन-शैली, उनकी अपनी समस्याएँ, स्वतंत्रता, जल, जंगल, जमीन, अपनी मातृभाषा, अपना इतिहास, लोककथाएँ, मुहावरें, मिथक, विकास की अपनी परिभाषा इत्यादि सब आदिवासी दर्शन के अंतर्गत निहित है। जल, जंगल, जमीन आदिवासियों के मूल आधार है और आदिवासी साहित्य के मूल तत्त्व भी यहीं होने चाहिए। आदिवासी दर्शन सहानुभूति या स्वानुभूति की बजाय सामूहिक अनुभूति में विश्वास करता है। उनके जीवन दर्शन में श्रम की महत्ता है, नैतिकता है, न्याय है, सामुदायिक एकता है। चूँकि आदिवासियों का प्राचीन साहित्य अलिखित है जो मौखिक परंपरा के अंतर्गत आता है। इसी साहित्य में उनका जीवन दर्शन निहित है जिसे लिखित होने के अभाव में कभी देखने का प्रयास नहीं किया गया। इसी मौखिक परंपरा का पुनर्पाठ करने की जरूरत है। आदिवासी दर्शन यह बतलाता है कि प्रकृति का उतना ही उपभोग करो जितना जीवन के लिए जरूरी है, विकासात्मक प्रक्रिया की होड़ में और अपने तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति के लिए प्रकृति को नष्ट मत करो। यदि इसी प्रकार प्रकृति का अंधाधुंध दोहन होता रहा तो शीघ्र ही मानव सभ्यता अपने विनाश के कगार पर पहुँच जायेगी और इस संकट से संपूर्ण विश्व को आदिवासी दर्शन ही बचा सकता है।

आदिवासी साहित्य - आदिवासी साहित्य वन संस्कृति से संबंधित साहित्य है। आदिवासी साहित्य वन जंगलों में रहने वाले उन वंचितों का साहित्य है, जिनके प्रश्नों का अतीत में कभी उत्तर ही नहीं दिया गया। यह ऐसे दुर्लक्षितों का साहित्य है, जिनके आक्रोश पर मुख्यधारा की समाज-व्यवस्था ने कान ही नहीं धरे। यह गिरि-कन्दराओं में रहने वाले अन्याय ग्रस्तों का क्रांति साहित्य है। सदियों से जारी क्रुर और कठोर न्याय-व्यवस्था ने जिनकी सैंकड़ो पीढ़ियों को आजीवन वनवास दिया, उस आदिम समूह का मुक्ति-साहित्य है आदिवासी साहित्य। वनवासियों का क्षत जीवन, जिस संस्कृति की गोद में छुपा रहा, उसी संस्कृति के प्राचीन इतिहास की खोज है यह साहित्य। आदिवासी साहित्य इस भूमि से प्रसूत आदिम-वेदना तथा अनुभव का शब्दरूप है।’

आधुनिक - आधुनिक शब्द का प्रयोग विशेषण के रूप में परंपरा से विद्रोह या प्राचीन के विपरीत नवीन रुझानों के लिए होता है। आधुनिकीकरण का संबंध पूँजीवादी व्यवस्था के तहत किए जा रहे यंत्रीकरण तथा औद्योगीकरण से है। आधुनिकता का संबंध आधुनिकीकरण के फलस्वरूप प्राचीन तथा पारंपरिक विचारों एवं मूल्यों, धार्मिक विश्वासों और रूढ़िगत रीति-रिवाजों के विरुद्ध नवीन आविष्कारों, विचारों, मूल्यों और व्यवहारों से है। यही नवीन विचार, मूल्य और व्यवहारों ने जब आंदोलन एवं विचारधारा का स्वरूप ले लिया तो उसे आधुनिकतावाद कहा जाने लगा।

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