कहां खो गए राम ?

                                 -डॉ ० विजयानन्द

कहां खो गए राम ? आपको खोज रहा रहा हूं।

घट-घट में रहते राम ?आपको खोज रहा हूं।।

यज्ञ विध्वंसक ताड़का को,तुमने ही जाकर मारा था।

गुरु विश्वामित्र का साथ निभाया,दुष्टों को संहारा था।।

अब यज्ञ नहीं करता कोई,करता तो अपमानित होता।

कुछ का बढ़ता अभिमान, कोई मद में न करता काम।।

                                कहां खो गए राम…?….।।

पति गौतम को धोखा देकर, पत्थर बनी अहिल्या।

उस पतिता को तार दिया, थी नहीं कोई समतुल्या।।

पतिव्रत को परिभाषित करके,  खूब बढ़ाई शान,

आज अहिल्याएं हैं घर घर, हैं पति बहुत परेशान।।

                              कहां खो गए राम..?…।।

शबरी जाति दलित हो बैठी, घर घर चूल्हा चौका।

गुरु मतंग से नहीं रह गए, जो हैं वे देते धोखा।।

कुछ गुरुओं को जेल भेज, आनंद करें शिष्याएं।

धन ,दौलत के कारण अब,बिकती हैं मर्यादाएं ।।

                             कहां खो गए राम…?…।।

धन का इतना जोर बढ़ा,पद,कुर्सी सब पर भारी।

जिसके पास नहीं हो यह , उसे कहें व्यभिचारी।

बालि और सुग्रीव यहां पर, हैं घर-घर पाए जाते।

धन ,धरती, स्त्री के कारण,अक्सर होता संग्राम।।

                             कहां खो गए राम ?….।।

सीता का अपहरण हुआ तो, विभीषण साथ तुम्हारे।

लंका का विध्वंस हुआ,तब रावण को जाकर मारे।।

अब तो घर घर छिपे हैं रावण, बना मोहल्ला लंका।

कुंभकरण खाकर सोए हैं,अक्षय,मेघनाद का डंका।।

                          कहां खो गए राम ? ……।।

वह रावण,जिसने सीता का,केवल अपहरण किया था।

लंका में उन्हें छुआ भी नहीं,नारी का मान दिया था।।

अपनी बहन की मर्यादा हित, अपना किया बलिदान।

आज अपहरण,बलात्कार का,है कैसा ? यह विधान।।                                                            

यह भी पढ़ें -  अल्फ़ाज़ हमारे

 कहां खो गए राम …?….।।

भाई भाई का द्रोह हो रहा , हर घर एक विभीषण।

रावण चौराहों पर घूमें, फिर भी उनका आकर्षण।।

दुष्ट नहीं डरते थोड़ा भी ,यह मैं खुद देख रहा हूं।

दंडित उन्हें न कोई करता , बैठे मैं सोच रहा हूं।।

                             कहां खो गए राम..?…..।।

हर वर्ष जलाते हैं रावण,पर वह रक्तबीज सा फैला ।

अत्याचार बहुत धरती पर, जीवन हो रहा विषैला ।।

आ जाओ फिर से तुमको,धरती से पाप मिटाना है।

ये पथराई आंखें खोजें,कोरोना तो एक बहाना है।।

कहां खो गए राम. .? आपको खोज रहा हूं ।

घट घट में रहते राम ?आपको खोज रहा हूं।।

अध्यक्ष -केंद्रीय विद्यापीठ,

हवेलिया ,झूसी, प्रयागराज ,उत्तर प्रदेश- 2110 19, भारत

मो0–9335138382

Sending
User Review
( votes)

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.