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  • पलायन

    उदास बूढ़ी आँखें इन्तजार करती है शहर गये बच्चे लाैटकर नहीं आते। घर जाे कभी जीवित थे यहाँ हाे गये हैं खडंहर उनकी यादाें मे। उजड़े हुए खेत सुन्सान गलियाँ आैर हर आैर पसरा हुआ सन्नाटा। न त्याैहाराे में न समाराेहाें में शहर गये बच्चे लाैटकर नहीं आते।

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