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  • अजन्मा प्रतिकार

                       “ अजन्मा प्रतिकार”                                      ---राजा सिंह मेरे भीतर , जन्म ले रहा है एक भ्रूण. इसका पालन पोषण मेरा शरीर नहीं , वरन करता है मेरा कुंठित मन , और कुंठित मन का अधार है बेकारी, भुखमरी,भ्रष्टाचार और अन्याय तथा शोषण का फैला हुआ साम्राज्य. अगर हालत यही रहे तो भ्रूण बनेगा ...

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