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हे पिता ! तुम्हारी बहुत याद आती है … (कविता)

जब जब यह दुनिया , पितृ दिवस मनाती है। जब जब कोई संतान , अपने पिता का सानिध्य पाती है । वो खुशनसीब है संतान , जिनको माता -पिता दोनों की , सेवा -सत्कार नसीब होता है। जब -जब कोई पुत्री /पुत्र अपना मनचाहा पुरस्कार लेने , अपनी ज़िद पूरी करवाने का सौभाग्य पाता है। आगे पढ़ें

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हाय वेदना !तू न जाएगी मेरे मन से …. (कविता)

हाय वेदना ! तू ना जाएगी मेरे मन से ? जिस तरह जुड़ी हुई है तू मेरे जीवन से । द्रवित हो जाता है मेरा ही मन बार -बार , आंसुओं की वर्षा बरसने लगती है नैनो से । कभी अपनों के तिरस्कार से त्रस्त होती हूँ, तो कभी घायल हो जाती हूँ उनके कटु आगे पढ़ें

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