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  • हे अर्जुन...

    हे अर्जुन उठा गांडीव पोंछ दे मानवता के अश्रु से भींगे नयन याद कर वो सभा हारे थे स्वाभिमान तुम्हारे जब सकुनी के पासों से खिंचे थे वस्त्र लज्जा के, जब दुःशासन के हाथों ने ये वही कर्ण है,जिसके शब्द नही रुके थे ये वही भीष्म हैं,जिनके...

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