हिंदी भाषा शिक्षण हेतु वेब आधारित सामग्री का मूल्यांकन

संजय कुमार
पी-एच.डी. हिंदी (भाषा प्रौद्योगिकी)
भाषा प्रौद्योगिकी विभाग, भाषा विद्यापीठ
म.गां.अं.हि.वि. वर्धा

सार

पिछले दो दशक में प्रौद्योगिकी का विकास हुआ है वह बेशक असाधारण और आश्चर्यजनक रूप से निरंतर आगे बढ़ रही है। आज इंटरनेट का व्यापक उपयोग भाषा शिक्षण के लिए हो रहा है। अनेक अन्य भाषाओं के लिए नए-नए वेबसाइट डिजाइन किए जा रहे है। जहाँ मल्टीमीडिया और हाइपर्टेक्ट के माध्यम से कथ्य, ध्वनि, एवं वीडियों आदि की सहायता से भाषा का शिक्षण अधिगम किया जाता है। हिंदी भाषा के शिक्षकों द्वारा भी स्वीकार किया गया है कि यह भाषा और संचार के लिए प्रामाणिक स्रोत है। भाषा शिक्षण से संबंधित वेबसाइट बहुत ही सरल होती है। इंटरनेट सुविधा से युक्त विद्यार्थी सहज और सरल तरीके से भाषा अधिगम में समर्पित वेबसाइट पर लाँगऑन करके भाषा का अध्ययन कर हिंदी भाषा में प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी लक्ष्य भाषा का अभ्यास कर सकते हैं।

इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उन वेबसाइट का मूल्यांकन करना है, जो हिंदी भाषा अधिगम हेतु समर्पित है।

की-वर्ड-

इंटरनेट, वेबसाइट, भाषा शिक्षण।

प्रस्तावना

पिछले दो दशक में जिस गति से तकनीक विकसित हुई है, वह स्वीकार्य रूप से असाधारण एवं निरंतर चकित करने वाली है। हिंदी भाषा अधिगम हेतु पर्याप्त संख्या में अकादिमिक संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों एवं व्यक्तियों ने वेबसाइट प्रकाशित किए हैं। शिक्षण संबंधी सॉफ़्टवेयर में भी एक क्रांतिकारी परिवर्तन यह हुआ है कि जो सॉफ़्टवेयर कल तक संगणक कार्यक्रम हेतु प्रयोग में लाए जा रहे थे वे अधिकाधिक सरल एवं संग्राह्य हो गए है। वही दूसरी ओर levy(1997) के अपने शब्दों में कहा है कि “हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर के तीव्र विकास ने शिक्षार्थीयों हेतु मूल्यांकन करने के लिए बहुत अल्प समय छोड़ दिया है, शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का निरंतर तीव्र विकास ने ठीक प्रकार से मूल्यांकन करने की क्षमता को भी बहुत पीछे छोड़ दिया है।”[1] तकनीकी के विकास के कारण एक से अधिक संख्या में वेबसाइट उपलब्ध है। एक उदाहरण यह है कि ‘भाषा शिक्षण या भाषा अधिगम’ को इंटरनेट के सर्च इंजन पर डालते ही इंटरनेट एक से अधिक उन वेबसाइट का विवरण प्रस्तुत करने लगता है जो भाषा शिक्षण में सहायक होती है। परिणाम स्वरूप एक इंटरनेट उन्मुख भाषा शिक्षक के लिए ये दुष्कर हो जाता है कि वे किन-किन वेबसाइट को खोजें, वर्गीकृत करे, मूल्यांकित करे या अपने शिक्षण में किन वेबसाइट को जोड़े।

वेबसाइट-

वेबसाइट सर्वर पर डिजिटल रूप में संचित होती है वेबसाइट को कंप्यूटर या लेपटॉप पर देखने के लिए एक विशेष प्रोग्राम का उपयोग किया जाता जिसे हम वेब ब्राउजर (इन्टरनेट एक्स्प्लोरर, मोजिला फ़ायरफ़ॉक्स, सफारी, ऑपेरा, फ्लॉक और गूगल क्रोम) कहते है। वेबसाइट को URL (यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर) के रूप में लोकेट किया जाता है। वेबएड्रेस या डोमेन नेम यह किसी विशिष्ट फ़ाइल, डायरेक्टरी या वेबसाइट के पेज का एड्रस होता हैं| वेबसाइट का एड्रेस वेबसाइट के होम पेज को रिप्रेजेंटे करता है। इस वेबएड्रेस का आरंभ अंग्रेज़ी के अक्षर-समूह http (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल) से होता है, जैसे-

  • http://www.ispeakhindi.com/
  • http://www.mindurhindi.com
  • http://www.akhlesh.com
  • http://www.rocketlanguages.com/hindi/
  • http://www.learning-hindi.com
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वेब पर उपलब्ध शिक्षण कार्यक्रम ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम है। जिसे हम अन्य नाम जैसे- आभासी शिक्षण, इंटरनेट आधारित शिक्षण और वेब आधारित शिक्षण के नाम से जानते हैं। यह दूरस्थ शिक्षण कार्यक्रम है। इसमें भौगोलिक सीमाएँ नहीं होती हैं। यहाँ शिक्षण सामग्री कथ्य, श्रव्य और श्रव्य-दृश्य रूप में होती हैं। जिसके माध्यम से भाषा शिक्षण और अधिगम का कार्य किया जाता है। वेब पाठ्यक्रम के अंतर्गत संचार साधनों के रूप में चैट रूम, ई-मेल, आदि का उपयोग किया जाता है।

सामग्री-

आज कल वेबसाइट का प्रयोग भाषा शिक्षण के लिए अधिक हो रहा है। जिससे कुछ समस्याएँ भी आ सकती है, क्योंकि यहाँ भाषा शिक्षण सामग्री बहुत अधिक मात्रा में होती है और प्रभूत सामग्री के कारण हतोत्साहित और विचलित होने की संभावना बनी रहती है। प्रकाशन से पूर्व सामग्री की छँटनी के अभाव में वर्तनी और व्याकरण की त्रुटियों के अतिरिक्त बिशिष्ट अस्वीकार्य सांस्कृतिक सूचनाओं के निहित होने की स्थिति बनी रहती है, और वेब पर प्रस्तुत सामग्री में विषयनुसार संरचित न होने के कारण उसे खोजना कठिन हो जाता है, इन सभी संभावित उपयोगों और समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए वेब आधारित भाषा शिक्षण सामग्री का मूल्यांकन किया जाता है।

भाषा शिक्षण और अधिगम हेतु इंटरनेट के चार प्रकार से उपयोग होते हैं-

  1. व्यक्ति उपयोग
  2. सामूहिक उपयोग
  3. वर्गीय कक्षा उपयोग
  4. स्वीकार्य पहुँच उपयोग

इंटरनेट आधारित सामग्रियों का मूल्यांकन- मूल्यांकन दोनों आधार पर संभव है।

  1. भाषा आधारभूत सिद्धांत
  2. भाषा का व्यवहार में अनुप्रयोग

यह मूल्यांकन इस बात का है कि क्या वेब आधारित सामग्री का आधारभूत सिद्धांत एवं व्यवहार में उसके वास्तविक अनुप्रयोग के आधार पर किया जा सकता है। प्रस्तुत मूल्यांकन में निम्नलिखित पर विचार किया गया है :-

  1. भाषा संबंधी मुद्दे (द्वितीय भाषा अर्जन के सिद्धांत, शिक्षण प्रविधियाँ)
  2. विषयवस्तुपरक मुद्दे (प्रामाणिकता,सटीकता,गुणवत्ता और सामग्री की मात्रा, संरचना और संगठन, इनपुट(निवेश), आउट्पुट(निर्गत),प्रतिपुष्टि वर्ग और स्वीकार्य के प्रयोजन के आधार पर उपयोगिता)
  3. मानव कंप्यूटर अंतरक्रिया (प्रयोजनीयता, अधिगम्यता, अंतरापृष्ठ)
  4. मल्टीमीडिया के अनुप्रयोगों की उपयुक्क्ता और प्रभावशीलता (दृश्यश्रव्य प्रस्तुति, पाठ ग्राफिक्स की उपयुकता और प्रभावशीलता, प्रयुक्त युक्तियाँ और प्रस्तुत सुविधाएँ)

मूल्यांकन में व्यक्तिगत आत्म-निरीक्षण अभिगम का उपयोग करते हुए अपने अनुभव के आधार पर कई उपरयुक्त चरों की जाँच सूची का प्रयोग करते हुए मूल्यांकन विंदुओं का मूल्यांकन किया। इस प्रकार के मूल्यांकन में वस्तुनिष्टता का अभाव हो सकता है भले ही इसके निराकरण के लिए एक से अधिक विशेषज्ञयों का उपयोग किया गया हो।

विधि-

यह मूल्यांकन एक समय अवधि (जुलाई 2016 से अगस्त 2016)में उपलब्ध 5 वेबसाइटों को लेकर किया गया है। वे सभी वेबसाइट किसी संस्था या संगठन से संबंधित है जो इस प्रकार हैं ।

  1. वेब साइट का नाम – I SPEAK HINDI

http://www.ISpeakHindi.com

Email:Support@ISpeakHindi.com

  1. वेब साइट का नाम – Mind ur Hindi
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http://www.mindurhindi.com

Contact : Akshay@mindurhindi.com

  1. वेब साइट का नाम – आओ हिंदी सीखें

http://www.akhlesh.com

akhlesh.agarwal@gmail.com

  1. वेब साइट का नाम – Rocket languages speak and understand a new language faster

http://www.rocketlanguages.com/hindi/

support@rocketlanguages.com

  1. वेब साइट का नाम – Learning Hindi!

वेब साइट का पता – http://www.learning-hindi.com

परिणाम :-

भाषा संबंधित चिंतन –

इनमें से अधिकतर वेबसाइटों में स्किनर के उद्दीपन, अनुक्रिया और पुनर्बलन के सिद्धांत पर आधारित हैं अर्थात व्यवहारवादी प्रकृति के है, और यहाँ यह आश्चर्यजनक है कि जो संरचना और शब्दावली सिखी जानी है उन्हें आदर्श निर्माण के लिए दोहराया नहीं गया है। यहाँ सीखने वालों के लिए पर्यटन से संबंधी जानकारी को सम्मिलित किया गया है जिससे उनके शब्दों के ज्ञान में वृद्धि हो, वह अपने व्यावहारिक जीवन में उनका श्रवण तथा व्याकरण का अभ्यास कर सकें। यहाँ भाषा जानकारी के स्रोत का कार्य करती है जिससे छात्र एक प्राक्क्ल्पना तैयार कर भाषा अधिगम प्रक्रिया में सक्रियता के साथ भाग ले सके।

इन साइटों का आधारभूत सिद्धांत SLA(द्वितीय भाषा अर्जन के सिद्धांत) के लक्ष्य के अनुरूप है जो श्रोतागण प्रयोजन तथा स्थिति के अनुरूप औपचारिक और अनौपचारिक प्रस्थितियों में संप्रेषण एवं सांस्कृतिक रूप में स्वीकार्य विधियों से हिंदी भाषा व्यवहार का कार्य करता है। कुछ वेबसाइटों में अंतरण,संज्ञानात्मक, नमनीयता तथा निर्माणत्कतावाद के सिद्धांतों का वेहतर उपयोग किया गया है।

विषयवस्तुपरक मुद्दे-

  1. भाषा आधारित विचार/ मुद्दे – अधिकांश साइट अभ्यास आधारित है।
  2. सामग्री – सभी वेबसाइट पर उपलब्ध सामग्री प्रामाणिक हैं। सामगी में वर्तनीगत त्रुटियाँ नहीं के बराबर पाई गयी सामान्यतः कुछ त्रुटि पंचमाक्षर से संबंधित थे। ये इस बात का द्योतक है कि वेबसाइट का अद्यतीकरण नहीं किया गया है।
  3. संरचना – संरचना से संबंधित किसी प्रकार की त्रुटि नहीं पाई गई।
  4. गुणवत्ता और सामग्री की मात्रा- प्रयोजन के अनुसार सामग्री की मात्रा और गुणवत्ता उपयुक्त है।

मानव कंप्यूटर अंतरक्रिया-

  1. प्रयोग अंतरापृष्ठ- वेबसाइट सही तरह से निर्मित है, इनमें रंगों, इंटरनेट डिज़ाइन तकनीकों, मानव मशीन अंतरापृष्ठ तकनीकों का उपयोग किया गया हैं।

उपयुक्कता और प्रभावशीलता (मल्टीमीडिया अनुप्रयोगों का)-

  1. I SPEAK HINDI- पाठ कथ्य और श्रव्य में है। पाठों को अधिगमकर्ता के आरंभिक स्तर, मध्य स्तर और उच्च स्तर में विभाजित कर प्रस्तुत किया गया है।
  2. Mind ur Hindi- इस वेबसाइट पर हिंदी वर्णमाला, हिंदी अभ्यास, हिंदी पाठ, हिंदी व्याकरण, हिंदी संवाद शीर्षक दिए गए हैं। हिंदी वर्णमाला से संबंधित पाठ स्वर, व्यंजन और बारहखड़ी को क्थ्य और श्रव्य रूप में दिए गए हैं। हिंदी पाठ के अंतर्गत पाठों को फ्लैस कार्ड के माध्यम से अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद एवं हिंदी वाक्यों का लिप्यंत्रण कर प्रस्तुत किया गया है। हिंदी अभ्यास के अंतर्गत अंग्रेज़ी शब्द का हिंदी में अनुवाद कर हिंदी शब्द को वाक्य में प्रयोग कर प्रस्तुत किया गया है। ये पाठ कथ्य रूप में है।
  3. आओ हिंदी सीखें- इस वेबसाइट की सामग्री ईमेज के रूप में है। जिसे अधिगमकर्ता पढ़ सकता है, साथ ही उसे डाउनलोड भी कर सकते हैं।
  4. Rocket languages- इस वेबसाइट पर पाठ श्रव्य रूप में दिया गया है। पाठ के वाक्य/शब्द हिंदी और अंग्रेज़ी में दिए गए हैं। साथ ही हिंदी शब्द/ वाक्य का लिप्यंत्रण कर प्रस्तुत किया गया है।
  5. Learning Hindi!- शिक्षण और अधिगम सामग्री को छोटे-छोटे पाठ में विभक्त किया गया हैं जैसे- स्वर ध्वनियां (अ,आ) (इ,ई) (उ,ऊ) (ए,ऐ) (ओ,औ) (ऋ) में विभाजन कर प्रस्तुत किया गया है, उसी प्रकार व्यंजन ध्वनियां को उच्चारण स्थान के आधार पर विभाजित किया गया है। स्वर और व्यंजन ध्वनियां के उच्चारण दिए गए हैं। शेष पाठ कथ्य रूप में दिए गए हैं। उन पाठ में प्रयुक्त शब्द आदि को चित्रों के माध्यम दर्शाया गया है।
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निष्कर्षतः-

यहाँ जितनी भी वेबसाइटों का मूल्यांकन किया गया है वे सही तरह से निर्मित है इनमें रंगों,इंटरनेट डिजाइन तकनीकों, मानव मशीन अंतरापृष्ठ तकनीकों का उपयोग किया गया है। तथा जो सामग्री प्रस्तुत की गई वह भी सटीक और शैक्षणिक गुणवत्तायुक्त पाई गई। यहाँ मूल्यांकन में यह भी दिखाया गया है कि जिस वेबसाइटों का मूल्यांकन किया गया है उनमें से अधिकांश प्रकृति से व्यवहारवादी थी। यद्यपि ये पूर्णतः इच्छित आदत निर्माण हेतु पुनरावृत्तिपरक नहीं थी। यहाँ एक बात महत्वपूर्ण है कि CALL की तरह पुरानी शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देते हुए उच्च तकनीक का प्रयोग किया गया है। अन्य कल्पनाशील साइटों द्वारा प्रस्तुत भाषा संबंधित सामग्री सांस्कृतिक सूचनाओं सहित कई संदर्भों का उपयोग कर शिक्षार्थी के लिए नई-नई जानकारी देने का प्रयास किया गया है, जिससे कि वह सांस्कृतिक रूप से जागरूकता बढ़ाते हुए सीखने में सक्रिय रूप से संलग्न हो सके ।

अंततः यह दावा किया जा सकता है कि अधिकांश विदेशी भाषा के रूप में हिंदी भाषा शिक्षण वेबसाइट शिक्षक के अभाव में स्वयं संचालित की जा सकती है।

संदर्भ ग्रंथ सूची-

  1. गुप्त,मनोरमा, (): भाषा शिक्षण : सिद्धांत और प्रविधि, आगरा केंद्रीय हिंदी संस्थान|.
  2. नारंग, वैश्ना (1996):संप्रेषणपरक हिंदी भाषा शिक्षण, नई दिल्ली प्रकाशन संस्थान।
  3. भाटिया, कैलाशचंद्र (2001) : आधुनिक भाषा-शिक्षण, नई दिल्ली तक्षशिला प्रकाशन।
  4. शर्मा, डॉ. गीता, (2009): हिंदी शिक्षण सिद्धांत और व्यवहार, मेरठ: श्री हरिअंग प्रकाशन। .
  5. श्रीवास्तव, रवींद्रनाथ, (2000): अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान: सिद्धांत एवं प्रयोग, दिल्ली: राधाकृष्ण प्रकाशन लिमिटेड।

English book

वेब लिंक

  1. http://guides.library.cornell.edu/c.php?g=32334&p=203767&preview=ad0bac0490cf7ab0653096fe3b4a0fee
  2. http://www.lib.umd.edu/tl/guides/evaluating-web
  3. http://www.widener.edu/about/campus_resources/wolfgram_library/evaluate/
  4. http://lib.colostate.edu/howto/evalweb.html
  5. ttp://www.lib.vt.edu/instruct/evaluate/
  6. http://guides.lib.berkeley.edu/evaluating-resources
  7. http://www.library.kent.edu/criteria-evaluating-web-resources
  8. https://eprints.usq.edu.au/820/1/Son_ch13_2005.pdf
  9. http://www.conta.uom.gr/conta/publications/html/EVALUATION%20OF%20INTERNET%20BASED%20MATERIALS%20FOR%20LANGUAGE%20LEARNING.htm
  1. Levy, M. (1997). Computer-assisted language learning: Context and conceptualization. Oxford University Press.
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