महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के हिंदी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग के शोध-अध्येता एवं युवा कवि प्रदीप त्रिपाठी की पुस्तक ‘कल्पना का पहला दशक’ का विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में लोकार्पण संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से चर्चित कवि लीलाधर मंडलोई, वरिष्ठ कथाकार संजीव, रघुवंश मणि, विवेक मिश्र, राजकुमार राकेश, एवं अशोक मिश्र (संपादक, बहुवचन) उपस्थित थे।यह पुस्तक अकादमिक प्रतिभा प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित है। प्रदीप त्रिपाठी की अब तक साहित्य की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में लगभग 30 से अधिक कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में यह हिंदी एवं तुलनात्मक साहित्य विभाग में ‘अमरकांत की कहानियाँ : अंतर्वस्तु और शिल्प’ विषय पर शोधरत हैं। प्रदीप त्रिपाठी की यह पहली पुस्तक महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा को समर्पित है। इस पुस्तक में श्री त्रिपाठी ने गैर हिंदी भाषी क्षेत्र हैदराबाद से निकलने वाली अपने दौर की महत्वपूर्ण पत्रिका कल्पना के दस वर्षीय साहित्यिक यात्रा को साझा किया है। भाषा एवं साहित्य के विकास में कल्पना हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में एक कालजयी पत्रिका के रूप में अविस्मरणीय है। इस पुस्तक में साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ कल्पना की क्या भूमिका रही है, इसकी पड़ताल करते हुए उसकी विवेचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक व्याख्या की गई है या फिर उन पक्षों को उठाने का प्रयास किया गया है जो अब तक चर्चा से बाहर रहे हैं। निश्चित रूप से यह पुस्तक कल्पना की विकास-यात्रा को समझने के लिए एक मुकम्मल दस्तावेज़ के रूप में देखी जा सकती है।

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