वरिष्ठ लेखिका कृष्णा सोबती जी को 53 वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गयी है. डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, यारों के यार, तिन पहाड़, बादलों के घेरे, सूरजमुखी अंधेरे के, ज़िन्दगी़नामा, ऐ लड़की, दिलोदानिश, हम हशमत भाग एक तथा दो और समय सरगम तक उनकी कलम ने उत्तेजना, आलोचना विमर्श, सामाजिक और नैतिक बहसों की जो फिज़ा साहित्य में पैदा की है उसका स्पर्श पाठक लगातार महसूस करता रहा है। हाल ही में उनकी लंबी कहानी ए लडकी का स्वीडन में मंचन हुआ

उल्लेखनीय सम्मान 1999: कछा चुडामणी पुरस्कार
1981: शिरोमणी पुरस्कार
1982: हिन्दी अकादमी अवार्ड
2000-2001: शलाका पुरस्कार
1980: साहित्य अकादमी अवार्ड
1996: साहित्य अकादमी फेलोशिप

सूचना साभार: यूनीवार्ता 

चित्र साभार: द हिन्दू

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