हे बजट मित्र !!
हैरान हूं मैं
तुम्हारे
चमत्कार पर
तुम ऐसा
कर कैसे लेते हो ?
सता पक्ष को
दिखाई देते हो
दिलकश, हसीन
बला के जहीन
गरीबों के संरक्षक
श्याम धन भक्षक
देश के खेवनहार
शक्ति के आधार
प्रगति के प्रतीक
सीधे शरीफ़
सौम्य , रमणीक !

वही दूसरी ओर
उसी पोशाक में
अनबदली आँख नाक में
बिरोधियों को
आते हो नज़र
एक बूढा  शजर
जिस पर न
लगते हैं फल
जो न दे सकता है
किसी को  छाया
न बन  सकता है
गरीबों का सरमाया !
दिखते हो उन्हें
एकदम भद्दे कुरूप
अंधकूप
मुश्किलों के प्रारूप
जो सिर्फ़ पूंजीपतियों का
होगा ताबेदार
गरीबों का करेगा
और और बंटाधार

तुम कितने वर्षॊं से
यह कमाल कर रहे हो
एक ही समय पर
कुछ लोगों के लिये
अति सुंदर हो
और कुछ के लिये
निहायत बदसूरत
शायद यह कमाल
जैसी की उक्ति भी है
इसलिये होता है
क्योंकि सौन्दर्य
बस देखनेवाली
आँखों मे  होता है !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल

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