-ओंम प्रकाश नौटियाल

वड़ोदरा और गुजरात के कई अन्य स्थानों पर परसों सुबह से शाम तक लगातार वर्षा होती रही ।उसके बाद से भी अब तक रुक रुक कर कभी हल्की कभी तेज वर्षा जारी है । वड़ोदरा की स्थानीय टी वी चैनल पर  शहर भर में पानी भर जाने के समाचार आ रहे हैं,बाढ़ पीड़ित लोग अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं ,जान माल के लिये जद्दोजहद चल रही है ।  लोगों को प्रशासन की ओर से सुरक्षा निर्देश और आवश्यक चेतावनी लगातार दी जा रही है । दस वर्षीय प्रतीक अपने पापा अम्मा के साथ साँय का समाचार बुलेटिन देख रहा है । बाढ़ की भयावहता के द्दश्य विचलित करने वाले हैं । प्रतीक अपने पापा विनोद से निरंतर प्रश्न कर रहा है ।  प्रतीक की अम्मा कहने लगी ,”आप टी वी बंद कर दीजिए न, जब मुझ से यह सब नहीं देखा जा रहा है तो फिर प्रतीक तो बच्चा है ।” विनोद ने टी वी बंद कर दिया ।तभी  उदास मन से  प्रतीक पूछ बैठा ,” पापा आप तो कहते थे कि आपने अपने बचपन में देहरादून में अपने गाँव में कई कई दिनों की बरसात देखी है आपका गाँव क्यों नहीं डूबता था?”
” बेटा , तब से अब तक बहुत कुछ बदल गया है । आवासी मकानों और अंधाधुंध निर्माण कार्यों से पानी समा लेने वाली खाली धरती सिकुड गयी है ।कितने ही ताल तालाब सूखा कर पाट दिये गये हैं और  उन जमीनों पर अनधिकृत  कब्जे हो गये हैं नदियों के किनारे भी नदियों के  भीतर तक घुस गये हैं  नदी के नाम पर गाद ,रेत से भरी एक लकीर भर है । विकास के नाम पर वृक्ष धड्ड़ले से कट रहे हैं ।जल की निकासी नहीं है ।टूटी फूटी सीवर लाइने  चोक रहती हैं ।इन सब कारणों से एक दिन की भारी बारिश में भी भयंकर बाढ़ के हालात हो जाते हैं ।देहरादून हालाकि घाटी में है पर यह सब कारण तो कमोबेश अब वहाँ भी लागू हैं वहाँ भी कुछ समय की वर्षा में ही पानी भर जाता है “
” पापा, मेरा दोस्त है न विनय, जिसके पापा पार्षद हैं ,वह तो कह रहा था कि विश्वामित्री नदी में बाढ़ आने से यह सब होता है “
” बेटा विश्वामित्री तो अब एक मौसमी नदी है नदी क्या है गंदे नाले सी हो गयी है ।जब आजवा जलाशय में पानी खतरे से  ऊपर हो जाता है तो प्रशासन जलाशय के गेट खोल देता है यह पानी  बरसात के कारण पहले से ही उफन रही विश्वामित्री में बाढ़ ले आता है जिससे जलमग्न वडोदरा के हालात और भी बदतर हो जाते हैं   क्योंकि नदी नगर के मध्य से गुजरती है “
“पापा इसका उपाय क्या है?”
” बेटा जिन लोगों से उपाय  की अपेक्षा है वही तो ऐसे हालात बनने देने के लिये जिम्मेदार हैं इसीलिये वह बाते बनाकर, कोरे आश्वासन देकर और केवल मगरमच्छी आँसू बहाकर अपने कर्तव्य की इति श्री समझ लेते हैं ।”
” पापा मगरमच्छ तो विश्वामित्री में भी बहुत हैं “
” हाँ बेटा , सैकड़ों मगरमच्छ है विश्वामित्री में । पानी के  साथ मगरमच्छ भी सड़कों, घरों में आ जाते हैं ।उनसे नागरिकों की सुरक्षा  करना ,उन्हें पकड़ना भी प्रशासन के लिये बड़ी चुनौती है ।”
“पापा , अपने घर से बेघर होने की तकलीफ तो उन्हें भी होती होगी । रोते होगें बेचारे ।”
“हो ,सकता है बेटा ।”
“पापा कहीं ऐसा तो नही कि मगर मच्छों और नेताओं के मिलेजुले मगरमच्छी आँसुओं से बाढ़ का प्रकोप और बढ़ जाता हो ।”
” चल हट, शरारती कहीं का , अब जाओ होम वर्क करो अपना ।”
और प्रतीक के जाते ही विनोद फिर से टी वी पर समाचार देखने लगे ।
-ओंम प्रकाश नौटियाल
बड़ौदा, मोबा. 9427345810
(सर्वाधिकार सुरक्षित )

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