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*_व्यंग्यिका_ *” ब्रेकिंग न्यूज़”*

व्यंग्यिका " ब्रेकिंग न्यूज़" कोई अच्छा सच्चा काम कर रहा हो पर इन्हें उससे क्या बस बनी बनाई न्यूज़ चाहिए न्यूज़ देने वाला एक रसूख़...

#लोकसभा_चुनाव_2019

#लोकसभा_चुनाव_2019 अपनी बात अपने मुद्दे  जैसा कि आप सभी मित्र जानते हैं देश का महा पर्व लोकसभा चुनाव नजदीक है ऐसे में हम अपील करते हैं...

#शोध_आलेख_साहित्यिक_रचनाएँ_आमंत्रित [कृपया जानकारी साझा करें[

#शोध_आलेख_साहित्यिक_रचनाएँ_आमंत्रित के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों के नवीन विषयों पर वैचारिक लेख प्रकाशित किए जाते हैं। आप अपना लेख यूनिकोड फॉन्ट में एम.एस. वर्ड...

100 से अधिक हिंदी लेखकों का प्रधानमंत्री को खुला पत्र

सेवा में, श्री नरेन्द्र मोदी जी माननीय प्रधान मंत्री, भारत सरकार विषय : भोजपुरी या हिन्दी की किसी भी अन्य बोली को संविधान की #आठवीं_अनुसूची में शामिल न किया जाय. महोदय, हमारी...

12 प्रवासी साहित्यकारों पर प्रकाशित होनी वाली पुस्तक शृंखला की पहली पुस्तक श्री तेजेन्द्र शर्मा पर केंद्रित

डॉ. रमा और महेंद्र प्रजापति जी के संपादन में लगभग 12 प्रवासी साहित्यकारों पर प्रकाशित होनी वाली पुस्तक शृंखला की पहली पुस्तक शीघ्र ही...

2016 से दस्तख़त नाम से पत्रिका का पुनः प्रकाशन होने जा रहा है: विमलेश त्रिपाठी

आपकी पत्रिका दस्तख़त के प्रकाशन की घोषणा करते हुए हमें खुशी है।  2003 में अनहद के नाम से पत्रिका प्रकाशित हुई थी। उसके बाद उसका...

21 वी शताब्दी में हिंदी साहित्य शिक्षण: मनीष खारी

21 वी शताब्दी में हिंदी साहित्य शिक्षण                                                        मनीष खारी                                              ईमेल –manishkharibnps@gmail.com शोध सार-  प्रस्तुत शोध पत्र में हिंदी भाषा शिक्षण और साहित्य के सम्बन्ध की...

२१ वीं सदी की कवयित्रियों के काव्य में स्त्री विमर्श –  हरकीरत हीर 

२१ वीं सदी  में सबसे ज्यादा चर्चित विषय रहा है स्त्री विमर्श।  समाजशास्त्रियों के लिए, राजनीतिज्ञों के लिए और साहित्य के लिए पिछले ५०-६० वर्षों से यह स्त्री विमर्श, ‘नारी मुक्ति आन्दोलन’ के नाम पर एक नए रूप में सार्वजानिक रूप से एक ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है. सामान्य रूप से ' विमर्श ' अंग्रेजी के ' डिस्कोर्स ' शब्द के पर्याय के रूप में प्रचलित है , जिसका अर्थ उक्त विषय पर दीर्घ एवं गंभीर चिंतन करना है।  नारी विमर्श पश्चिमी देशों से आयातित एक संकल्पना (सामान्य विचार) है. इंग्लॅण्ड और अमेरिका में उन्नीसवीं शताब्दी में फेमिनिस्ट मूवमेंट से इसकी शुरुआत हुई.

21 वीं सदी में हिन्दी भाषा का सवाल- एक वाजिब सवाल: डॉ. मंजू कुमारी

आज 21वीं सदी में हिन्दी अब किसी एक क्षेत्र-विशेष की भाषा नहीं रही। वह वैश्विक हो तकनीकी कार्यों में भी प्रवेश कर रोजगार की भाषा बन रही है। हिन्दी भाषा विदेशों में भारतीय और उनकी भाषा हिन्दी एक रूप ग्रहण कर भारत की राष्ट्र भाषा के रूप में पूरे विश्व में स्वीकार की जा रही है। वैश्वीकरण के इस दौर में भारत में व्यापर और बाजार को बढ़ावा देने के लिए, हिन्दी भाषा के ज्ञान के बिना यहाँ के अधिकतम लोगों से संवाद करना संभव नहीं होगा।

२१वी सदी की ‘सुशीला’ को चाहिए ‘अनंत असीम दिगंत…..’-प्रो. डॉ. सौ. रमा प्र. नवले

मेहतर समाज की एक छोटी सी लड़की ‘सुशीला’ का अदम्य साहस अचंभित करता है| अत्यंत दरिद्र और सात भाई-बहनों के साथ एक बड़े परिवार में जीनेवाली यह लड़की, पिता के पढ़ाई बंद करने के निर्णय के विरुद्ध उपोषण करती है| एक ओर दरिद्रता और दूसरी ओर निम्न जाति में भी निम्न समझी जानेवाली मेहतर जाति के दंश की पीड़ा लगातार वह भुगतती रही है | ना वह अपनी सहेलियों के साथ बैठ पाई न खेल पाई और ना ही पीएच. डी. जैसी उच्चतम उपाधि पाने के बाद भी ‘झाडूवाली’ शब्द से छुटकारा पा सकी; पर ताज्जुब यह है कि जाति और लिंग भेद के अंधे कुँए के अँधेरे को चीरकर सतरंगी सपने बराबर वह देखती रही है|

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