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हरकीरत हीर

हरकीरत हीर की कविताएँ

अभी ख़ौफज़दा हैं ज़ख़्म ………….मैंने .... कह दिया है ख़ामोशी से कुछ दिन और रहे संग मेरे ....कि आग में जलकर मिट...

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