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नवगीत

आँख चिड़िया की दिखे

हर किसी के हाथ में गाण्डीव है अब आँख चिड़िया की दिखे तो बात भी है । आदमी के हाथ में बाजार है या बिक...

श्रमिक वेदना

*विधा - नवगीत मापनी - 16/14 श्रमिक वेदना गृह दर से निकला मैं यूंही कई ऋणों का भार लिए। गर्म पसीना तन से बहता निर्मम हाहाकार लिए।। उदर भूख से जकड़ा...

पिया परदेश में है ए सखी उनको मनाऊँगी

पिया परदेस में कमाने को गए है त्योहार पास में ही सखी अगर वे न आए तो में एक भी दीपक नही जलाऊंगी वे आएँगे तभी त्योहार मनाऊँगी ।

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