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लोक साहित्य एवं संस्कृति

हरियाणवी लोक साहित्य में अंबेडकरवाद के प्रवर्तक महाशय छज्जूलाल सिलाणा- दीपक मेवाती

छज्जूलाल ने अपना संपूर्ण जीवन समाज की बुराइयों पर लिखते हुए आमजन के बीच बदलाव की बात करते हुए एवं अंबेडकरवाद का प्रचार-प्रसार करते हुए व्यतीत किया।

लोक साहित्य में प्रकृति वर्णन की शिष्ट साहित्य से तुलना

लोकसाहित्य में नगर, शहर और ग्रामीण जीवन का वह समस्त साहित्य आ जाता है जिनमें अंचल विशेष की परम्परा का निर्वाह होता है।

विभिन्न भाषाओं की लोककथा हिंदी में

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बुन्देली भाषा, साहित्य एवं संस्कृति पर आधारित पुस्तकें

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बघेली भाषा, साहित्य एवं संस्कृति पर आधारित पुस्तकें

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मगही भाषा, साहित्य एवं संस्कृति पर आधारित पुस्तकें

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अवधी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति पर आधारित पुस्तकें

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भोजपुरी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति पर आधारित पुस्तकें

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ब्रज के संस्कार लोक-गीतों में निहित नारी वेदना-डॉ. बौबी शर्मा

ब्रज के लोक-गीतों में वहाँ का सम्पूर्ण जीवन प्रतिबिम्बित होता है। ब्रज क्षेत्र के सुख-दुख, आमोद-प्रमोद, आनन्द उत्साह आदि की अभिव्यक्ति इन लोकगीतों के माध्यम से होती है। जनमानस के सर्वाधिक नैकट्य के कारण लोक-जीवन की जैसी सफल अभिव्यक्ति इन गीतों के माध्यम से होती है

अरुणाचल प्रदेश की आका जनजाति

‘आका’ असमिया भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है चेहरे को रंगना। आका जनजाति के लोग पश्चिमी कामेंग जिले में निवास करते हैं और स्वयं को हृसों कहते हैं।

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