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हिंदी भाषा

हिंदी भाषा का अखिल भारतीय वैश्विक स्वरुप Hindi Bhasha

आज हिंदी जिस जगह और जिस रुप में खड़ी है, वह अखिल भारतीय और वैश्विक स्वरुप है। भारत की संस्कृति और राजनीति की भाषा है। इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है जिसेसही दिशा में और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

संपर्क भाषा के रूप में भारत में हिंदी

संपर्क भाषा मातृभाषा से अलग भाषा होती है जो हमें अपने भाषा समुदाय से भिन्न भाषा समुदाय से संपर्क स्थापित करने में मदद करती है। जिस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेजी को संपर्क भाषा का दर्जा प्राप्त है उसी प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर भारत में हिंदी को संपर्क भाषा का दर्जा दिया गया है।

राजभाषा हिन्दी : समृद्ध इतिहास और भावी चुनौतियाँ

घ का कर्तव्य होगा कि वह हिन्दी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे , जिससे भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्त्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके

हिंदी और मराठी की समान रूपी भिन्‍नार्थी शब्‍दावली

हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं की शब्‍दावली विभिन्‍न स्रोतों से आई है । आर्य परिवार की भाषाएं होने के कारण दोनों पर संस्‍कृत का अधिक प्रभाव है ।

भाषा की बदलती पहचान

आज हिंदी का प्रभाव ग्लोबल रूप में बढ़ रहा है तो उसका सबसे बड़ा कारण हमारा उत्तर आधुनिक होता समाज,औद्योगिक क्रांति और संचार माध्यमों का बढ़ता प्रयोग.इनके अलावा हिंदी आज मीडिया,मनोरंजन,राजनीति और विज्ञापन की भाषा के रूप में तब्दील होती जा रही है.

भाषा और जनविसर्जन के संदर्भ में हिंदी के व्यावहारिक और मानक रूपों की सीमाएं और संभावनाएं

हिंदी मानक वस्तुत: भाषा का व्याकरण सम्मत, शुद्ध, परिनिष्ठित, परिमार्जित रूप होता है। इस स्थान पर पहुंचने केलिए भाषा को कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। पहले स्तर पर भाषा का मूल रूप बोली होता है। इसका क्षेत्र सीमित होता है।

भारतीय संविधान में राष्ट्र (संघ), राज्य और भाषा का अन्तः सम्बन्ध और उससे जुड़ी समस्याएँ

यहाँ राष्ट्र (संघ), राज्य और भाषा के संवैधानिक संबंधों के साथ-साथ उनसे जुड़ी समस्याओं को समझने की कोशिश की गई। जिसमें विभिन्न विद्वानों के विचारों को व्यक्त किया गया।

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