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हिंदी व्याकरण

हिंदी भाषा का अखिल भारतीय वैश्विक स्वरुप Hindi Bhasha

आज हिंदी जिस जगह और जिस रुप में खड़ी है, वह अखिल भारतीय और वैश्विक स्वरुप है। भारत की संस्कृति और राजनीति की भाषा है। इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है जिसेसही दिशा में और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

अलंकार अर्थ, परिभाषा, प्रकार Alankaar

जो किसी वस्तु को अलंकृत करे वह अलंकार alankarकहलाता है।

प्रत्यय अर्थ, परिभाषा, भेद, उदाहरण pratyay

जो शब्दांश, शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ में परिवर्तन लाये, प्रत्यय pratyay कहलाते है।मूलतः प्रत्यय के दो प्रकार है -कृत् प्रत्यय (कृदन्त) (Agentive) तद्धित प्रत्यय (Nominal)

विशेषण, विशेष्य और प्रविशेषण visheshan

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताते है उन्हें विशेषण Adjective कहते है। जो शब्द विशेषण की विशेषता बताते है, वे प्रविशेषण कहलाते है।

उपसर्ग अर्थ, परिभाषा, विशेषता एवं उदाहरण। उपसर्ग

upsarg उपसर्ग उस शब्दांश या अव्यय को कहते है, जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करता है।

सर्वनाम। sarvnam

जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता है, उन्हें सर्वनाम कहते है।

तत्सम और तद्भव शब्द । tatsam aur tadbhav shabd

हिंदी भाषा में उत्पत्ति की दृष्टि से शब्द चार प्रकार ( तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी ) के होते हैं।

संपर्क भाषा के रूप में भारत में हिंदी

संपर्क भाषा मातृभाषा से अलग भाषा होती है जो हमें अपने भाषा समुदाय से भिन्न भाषा समुदाय से संपर्क स्थापित करने में मदद करती है। जिस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेजी को संपर्क भाषा का दर्जा प्राप्त है उसी प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर भारत में हिंदी को संपर्क भाषा का दर्जा दिया गया है।

राजभाषा हिन्दी : समृद्ध इतिहास और भावी चुनौतियाँ

घ का कर्तव्य होगा कि वह हिन्दी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे , जिससे भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्त्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके

राष्ट्रभाषा हिन्दी और जनपदीय बोलियाँ

राष्ट्रभाषा हिन्दी व उनकी सभी बोलियों का मूल स्रोत संस्कृत भाषा है।वैदिक साहित्य की भाषा के विश्लेषण से ये संकेत तो स्पष्ट मिलते हैं कि उस काल में बोलचाल में तीन प्रकार की बोलियां थीं-पश्चिमोत्तरी, मध्यवर्ती तथा पूर्वी

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