33.1 C
Delhi
- Advertisement -spot_img

CATEGORY

शोध विमर्श

परिकल्पनाएँ (Hypothesis), उद्देश्य (Objectives), एवं निष्कर्ष ( Findings) का स्वरुप : एक अवलोकन

अनुसंधान की एक निश्चित पद्धति है ; जिसे अनुसंधान प्रविधि कहा जाता है| इस प्रविधि के अनुसार ही शोध कार्य होना चाहिए|

शोध : अर्थ, परिभाषा और स्वरूप 

अंग्रेजी के रिसर्च के अर्थ के द्योतक खोज, अन्वेषक, अनुसंधान, शोध इत्यादि अनेक शब्द प्रचलित है

अंतरविषयी, बहुविषयी और परा विषयी अध्ययन का विश्लेषण

उत्तर आधुनिक पाठ्यक्रमों में जहाँ स्टडीज (studies) जैसे नए अनुशासनों का दायरा बढ़ा है वैसे ही पारंपरिक अनुशासनों की सैद्धान्तिकता, परिकल्पनाओं, संकल्पनाओं के दायरे में भी वृद्धि हुई है

शोध और बोध से ही राष्ट्र का विकास संभव-महेश तिवारी

किसी भी राष्ट्र की प्रगति और विकास का आकलन वहां पर संसाधन जुटा देने मात्र से नहीं होता, अपितु वहां के लोगों के द्वारा अपनाने वाली पद्धतियों, संस्कारों, मूल्यों, कार्य-शैलियों से राष्ट्र निर्माण होता है। ऐसे में जिस दौर में भारत के पास लगभग 65 फ़ीसदी आबादी युवाओं की है। साथ ही साथ देश की सियासी परिपाटी भी देश को विश्वगुरु और महाशक्ति बनाने की बात करती। ऐसे में हमें और हमारी व्यवस्था को देखना होगा, कि आख़िर क्या कारण है जिसकी वजह से हम इक्कीसवीं सदी में वैश्विक पटल पर पीछे छूट रहें। इतिहास की निगहबानी करें तो हमारा इतिहास तो कदापि ऐसा न था। जहां हम पिछड़े हुए अपने को महसूस करें। हम तो गौरवशाली इतिहास और परंपरा के वाहक रहें। ऐसे में जब हम आज के समय की स्थितियों और परिस्थितियों को देखते हैं। फ़िर एक बात स्पष्ट होती है, कि हमारे यहां आज के समय में कुछ खामियों ने घर कर लिया है। जैसे शिक्षा में गुणवत्ता नाम की चीज़ नहीं बची है। मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा को हम ढो रहें हैं। उच्च शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में शोध नाममात्र की बात समझ आती। इसके अलावा मानवीय पूंजी को हमारे यहां मानव संसाधन समझ लिया गया है। जिस कारण हम चाहकर भी विश्वगुरु बनने या विश्व को नेतृत्व करने की दिशा में आगेनहीं बढ़ पा रहें। ऐसे में अब हमें शोध के महत्व को समझना होगा। इसके साथ हर क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना होगा साथ ही साथ मानवीय पूंजी की अहमियत पर भी जोर देना होगा। तभी एक मजबूत राष्ट्र की तरफ़ हम अग्रसर हो पाएंगे।।

अंतरविषयी, बहुविषयी और परा विषयी अध्ययन का विश्लेषण: डॉ. अमित राय

विचार यह किया जाना चाहिए कि क्या कारण है कि इतिहास, समाजशास्त्र, हिंदी, समाज विज्ञान आदि पारंपरिक विषयों को स्टडीज शब्द से संबोधित क्यों नहीं किया जाता जबकि नए उत्तर आधुनिक पाठ्यक्रमों जैसे दलित अध्ययन, स्त्री अध्ययन, शान्ति अध्ययन आदि को ‘स्टडीज’ शब्द से संबोधित किया जाता है, दरअसल ये विषय उन पारंपरिक अनुशासनों की जटिलता को समाप्त कर अंतर्विषयकता को जन्म देते है जिसे हम अन्तरानुशासनिकता या अंतर्विषयकता कहते हैं।

Latest news

- Advertisement -spot_img