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भाषिक विमर्श

21 वीं सदी में हिन्दी भाषा का सवाल- एक वाजिब सवाल: डॉ. मंजू कुमारी

आज 21वीं सदी में हिन्दी अब किसी एक क्षेत्र-विशेष की भाषा नहीं रही। वह वैश्विक हो तकनीकी कार्यों में भी प्रवेश कर रोजगार की भाषा बन रही है। हिन्दी भाषा विदेशों में भारतीय और उनकी भाषा हिन्दी एक रूप ग्रहण कर भारत की राष्ट्र भाषा के रूप में पूरे विश्व में स्वीकार की जा रही है। वैश्वीकरण के इस दौर में भारत में व्यापर और बाजार को बढ़ावा देने के लिए, हिन्दी भाषा के ज्ञान के बिना यहाँ के अधिकतम लोगों से संवाद करना संभव नहीं होगा।

कोश विज्ञान की उपादेयता- डॅा. गीता नायक, श्रीमती अंजू श्रीवास्तव

भाषा यद्यपि ध्वनि के रूप में नैसर्गिक रूप से विद्यमान रही किंतु उसे अभिव्यक्ति का नियमित माध्यम बनाने के लिये ध्वनि विशेष को संचित करके वर्ण और फिर सभी को संज्ञा देने के लिये शब्दों का निर्माण किया गया है। अतः भाषा के संपूर्ण विस्तार में शब्दों का अत्याधिक महत्व है और किसी भाषा में सेंकडों वर्षो के प्रयोग के बाद जितने भी शब्दों का निर्माण किया गया हैं उसे जानने के लिये शब्दकोश का निर्माण बहुत जरूरी है। अन्यथा कम उपयोग या उपयोग न होने के कारण शब्द भाषा से गायब हो सकता है जो कि भाषा के लिये अमूल्य संपत्ति होता है।

हिंदी भाषा शिक्षण हेतु वेब आधारित सामग्री का मूल्यांकन-संजय कुमार

पिछले दो दशक में प्रौद्योगिकी का विकास हुआ है वह बेशक असाधारण और आश्चर्यजनक रूप से निरंतर आगे बढ़ रही है। आज इंटरनेट का व्यापक उपयोग भाषा शिक्षण के लिए हो रहा है। अनेक अन्य भाषाओं के लिए नए-नए वेबसाइट डिजाइन किए जा रहे है। जहाँ मल्टीमीडिया और हाइपर्टेक्ट के माध्यम से कथ्य, ध्वनि, एवं वीडियों आदि की सहायता से भाषा का शिक्षण अधिगम किया जाता है। हिंदी भाषा के शिक्षकों द्वारा भी स्वीकार किया गया है कि यह भाषा और संचार के लिए प्रामाणिक स्रोत है। भाषा शिक्षण से संबंधित वेबसाइट बहुत ही सरल होती है। इंटरनेट सुविधा से युक्त विद्यार्थी सहज और सरल तरीके से भाषा अधिगम में समर्पित वेबसाइट पर लाँगऑन करके भाषा का अध्ययन कर हिंदी भाषा में प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी लक्ष्य भाषा का अभ्यास कर सकते हैं।

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