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विचार-विमर्श

महात्मा गाँधी की पुस्तक ‘हिन्द स्वराज’ की प्रासंगिकता-अमन कुमार

महात्मा गाँधी की पुस्तक ‘हिन्द स्वराज’ की प्रासंगिकता अमन कुमार पीएच.डी(शोधार्थी) (गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय) मो. 931270598 ई.मेल- aman1994rai@gmail.com सारांशः- 2 अक्टूबर 2021 को महात्मा गांधी जी की 152 वीं जन्म...

आधे-अधूरे : एक यर्थाथवादी रंगशिल्प

‘आधे-अधूरे’ नाटक यथार्थवादी रंगशिल्प का सफल उदाहरण है, इसे समझने से पहले हमें रंगशिल्प के बारे में समझ लेना आवश्यक है

सरगुन निर्गुण मन की छाया बड़े सयाने भटके

एक बूंद,एकै माल मूतर, एक कहां, एक गूदा। एक जोती से सब उतपना, को बामन को शूदा।|

विद्रोह के बीज: थेरीगाथा

बसे पहला महिला लेखन हमें वैदिक काल में मिलता है। वेद की कई ऋचाओं की रचयिता महिलायें थीं। यह लेखन स्त्री लेखन की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण है।

नो मीन्स नो

तुल्या कुमारी शोधार्थी( हिन्दी विभाग) इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक ईमेल – tulyakumari216@gmail.com सार: पितृसत्ता भारतीय समाज में स्त्री का ‘हाँ’ जहाँ उसे आदर्श स्त्री बनाता है...

हिन्दी रंगमंच और प्रशिक्षण

कला प्रशिक्षण केन्द्र, वास्तव में 'शिल्प' या 'क्राफ़्ट' तथा 'तकनीक' का प्रशिक्षण देते हैं, कला अथवा कलात्मकता का नहीं। रंगमंच कला में, अंतर्शिल्पीय दक्षता की आवश्यकता होती है।

रवीन्‍द्रनाथ और निराला : कितने दूर, कितने पास

‘रवीन्‍द्र कविता- कानन’ जैसी भावनापूर्ण और आधिकारिक समालोचना लिखकर निराला ने हिन्‍दी साहित्यिकों का ध्‍यान टैगोर की ओर आकर्षित किया।

स्त्री-विमर्श और निराला के स्त्री विषयक निबंध

निराला- अशिक्षित, अनपढ़ होने के कारण ही हमारी स्त्रियों को संसार में नरक-यातनाएँ भोगनी पड़ती है – उनके दुखों का अंत नहीं होता ।

शेख अब्दुल्लाह और अलीगढ़ कन्या स्कूल

इस पेपर में शेख अब्दुल्लाह के मुस्लिम लड़कियों के लिए किये गये शैक्षिक कार्यों का उल्लेख किया जायेगा।

शिक्षा व्यवस्था व अध्यापक की भूमिका

अधिकांश लोग यह स्वीकारते है कि पढ़ाई-लिखाई को पटरी पर लाने के लिए यह जरूरी है कि स्कूलो में उचित संख्या में योग्य शिक्षको की नियुक्ति हो

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