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कविता की रचना प्रक्रिया

आचार्य शुक्ल के अनुसार जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की मुक्तावस्था रसदशा  कहलाती है,हृदय की  इसी  मुक्ति साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द-विधान करती आई है,उसे कविता कहते हैं।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम 2018 के अनुसार पीयर रिव्यू जर्नल हेतु नियम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के यूजीसी राजपत्र नियमानुसार शिक्षकों की नियुक्ति हेतु यूजीसी केयर के अतिरिक्त पीयर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित शोध आलेख भी मान्य है।

‘स्वप्न’ और ‘स्वप्नभंग’ के कथाकार: प्रभात रंजन – ध्रुव कुमार

प्रभात रंजन की कहानियों में जो घटनाएं हैं उनका कारण और उनका समय पहचानने के लिए ‘जानकीपुल’ कहानी का यह एक पैरा ही पर्याप्त है, ‘जब तक पक्की सड़क नहीं बनी थी मधुवन गांव के लोग बड़े संतोषपूर्वक रहते और नदी के उस पार के जीवन को शहर का जीवन मानते और अपने जीवन को ग्रामीण और बड़े संतोषपूर्वक अपना सुख-दुख जीते। कोलतार की उस पक्की सड़क ने उनके मन को उम्मीदों से भर दिया था। 

हिन्दी कहानी का सौन्दर्य : चिंतन और विश्लेषण – डॉ. प्रवीण कुमार

कहानी की संवेदना अपनी आरंभिक काल से जनचेतना को कैसे प्रभावित करती रही है और उसका विकास मौखिक से लिखित होने की प्रक्रिया में कैसे हुआ। इसकी रूपरेखा इस शोधपत्र में दिया गया है। प्रेमचंदपूर्व, प्रेमचंदयुगीन और प्रेमचंदोत्तर हिन्दी कहानी की न केवल संवेदना बदली है बल्कि उसका सौन्दर्यबोध भी बदलता गया है। प्रस्तुत शोधपत्र में इसकी खोज का एक प्रयास किया गया है।

सफलता

हम सभी जीवन में सफलता चाहते हैं, लेकिन सफलता सभी लोगों की कदमों को नहीं चूमती है, आखिर सवाल यह है की यह सफलता...

भारतीय मजदूर वर्ग और महामारी

कोविड-19 नामक भीषण महामारी ने लगभग पूरे विश्व को अपने आगोश में ले लिया है।इस महामारी के कारण वैश्विक सामाजिक,आर्थिक जीवन पूरी तरह बेपटरी...

कैसे बनेगा स्वदेशी से आत्मनिर्भर भारत

कैसे बनेगा स्वदेशी से आत्मनिर्भर भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के परिणामस्वरूप भारतीय समाज में जो परिवर्तन आया वह उन सभी परिवर्तनों से भिन्न था जो...

समीक्षा की दहलीज पर उपेक्षित रचनाएं: कौशलेंद्र प्रपन्न

समीक्षा की दहलीज पर उपेक्षित रचनाएं कौशलेंद्र प्रपन्न शिक्षा एवं भाषा विशेषज्ञ टेक महिन्द्रा फाउंडेशन दिल्ली आज साहित्य की विभिन्न विधाओं में हजारों की तदाद में रचनाएं हो रही...

यह समय और लेखक होने का मतलब: मनोज कुमार पांडेय

यह समय और लेखक होने का मतलब मनोज कुमार पांडेय जब मैंने लिखना शुरू किया तो एक लड़की थी जिसे मैं प्रभावित करना चाहता था। शुरुआत...

समय से मुठभेड़ : अदम गोंडवी- – वीणा भाटिया

समय से मुठभेड़ : अदम गोंडवी - वीणा भाटिया हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए। अपनी कुर्सी के लिए जज़्बात को मत...

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