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संस्मरण

केथी की कथा

मैं भारतीय संस्कारी दिल का होने से कुछ साफ करता हुआ प्रत्युत्तर दिया कि मैं शादीशुदा व बच्चों का पिता हूं, मेरे जीवन में उनके सामने कोई भी नहीं, यद्यपि केथी तुम भीनहीं।

बहादुर-उर्मिला शर्मा

अपने युवावस्था के दिनों से ही वह बिहार रोजी-रोटी के लिए आया । विवाहोपरांत पत्नी को भी साथ लाया था, लेकिन उसका मन यहाँ न रमा। अतः उसे पुनः नेपाल छोड़ आया । वह चार-पांच सालों पर अपने मुल्क अपने घर जाता था । किसी भी काम को वह बड़े मनोयोग से किया करता था ।

हे पिता ! तुम्हारी बहुत याद आती है … (कविता)

जब जब यह दुनिया , पितृ दिवस मनाती है। जब जब कोई संतान , अपने पिता का सानिध्य पाती है । वो खुशनसीब है संतान , जिनको माता -पिता...

नजीबाबाद के झरोखे से नित्यानंद मैठाणी- देवराज

आकाशवाणी भवन के निर्माण का ठेका नजीबाबाद के नामधारी रईस, सुरेशचंद्र जैन को मिला था और अपनी उन्मुक्त हँसी तथा आतिथ्य के लिए विख्यात, जगतनारायण मुष्टिक समस्त निर्माण गतिविधियों के प्रभारी थे। अनुशासन-पर्व (?) का दबाव रहा हो या कोई और कारण, इन लोगों ने बहुत कम समय में ही कोतवाली मार्ग पर मुख्य प्रसारण-भवन (रिकार्डिंग स्टूडियो तथा प्रशासनिक एकक) और कोटद्वार मार्ग पर समीपुर गाँव के निकट तकनीकी (प्रसारण-टावर) केंद्र बना कर खड़ा कर दिया। यही नित्यानंद मैठाणी के नजीबाबाद आने का समय है।

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