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व्यंग्य

परसाई : उत्पीड़ित शोषित अवाम की आवाज

परसाई ने अपने लेखन से एक बड़ी आबादी गरीब मजदूर और उत्पीड़ित और शोषित आबादी को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने में सफल हुए कि ये आजादी मुकम्मल आजादी नहीं है. परसाई ने अपने लेखन में व्यंग्य को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और व्यंग्य से उन्हें स्पिरिट मिलने लगी

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