हे पिता ! तुम्हारी बहुत याद आती है … (कविता)

जब जब यह दुनिया , पितृ दिवस मनाती है। जब जब कोई संतान , अपने पिता का सानिध्य पाती है …

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तुम

ये कविता प्रेमिका के संदर्भ में
लिखी गई है
को प्रेमी के मन का भाव प्रदर्शित करतीं है

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पलायन

उदास बूढ़ी आँखें इन्तजार करती है शहर गये बच्चे लाैटकर नहीं आते। घर जाे कभी जीवित थे यहाँ हाे गये …

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औरतों की जिंदगी में अब नही आता बसंत

 2 total views संक्षिप्त परिचय: मेरा परिचय राजेश्वरी जोशी अध्यापिका रा.उ.प्रा.वि.,रतनफार्म न 1, सितारगंज, उ. सि .नगर, उत्तराखंड कई विशिष्ट पत्रिका …

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एक गुमशुदा गाँव

एक छोटे से गाँव का वर्णन किया गया हैं जो पश्मिमी महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं। वहा का समुह किस तरह खुश हैं इस पर प्रकाश डाला गया हैं।

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“कृषकदेव”, हमारी आन, बान शान

*किसान हमारी आन बान शान
इनसे ही है सुरक्षित हिंदुस्तान*
(शीर्षक)

‘कृषक देव’ हम सुरक्षित हैं
जब तक तुम्हारा सरमाया है
हर विपत्ति में हर मौसम में
तुमने ही हमें बचाया है !
विश्व युद्ध काल ने दुनियाँ
की आजीविका लूटी थी
तुमसे हमारी उम्मीद उस
हाल में भी न टूटी थी !
सन 1997 का वो
दुर्गम दौर भी हमने देखा था
बाहरी चमक दिखावा था
बस नज़र का धोखा था !
दहाड़ते एशियाई शेर सभी
मुँह के बल गिरे थे
सब एक सरताज के आगे
हाथ जोड़े खड़े थे !
तब तुमने हमें बचाया था
तुमने ही पार लगाया था।
इस कोरोना काल में
जो दुरूह विपत्ति आयी है
तुमने ही हम सबकी कश्ती
फिर से पार लगाई है!
जी-तोड़ मेहनत करके
तुम पेट हमारा भरते हो
कपास उगाकर खेतों में
तुम तन को हमारे ढकते हो!
अपने बेटों को देश पर
निसंकोच न्यौछावर किया
हमें सुरक्षित रखने को
दुश्मनों की फ़ौज से लड़ते हो!
अच्छी फसल हमें सौंपकर
जो बचे वही खुद खाते हो !
हमें पूरी कपास देकर
ख़ुद फटेहाल रह जाते हो !
तुम्हारी ताकत और हिम्मत
को तहे दिल से नमन है
कैसे बेटों के बलिदान पर
चुपचाप अश्रु बहाते हो !
तुम थाती हो, सम्पति हो
और गर्व हो हिंदुस्तान का
पीढ़ियाँ शुक्र करेंगीं हरदम
तुम्हारे हर बलिदान का !!

©’शशि’ सर्वाधिकार सुरक्षित

#जयकिसान #जयजवान
#अनाजमंडी #देशभक्ति #सैनिक #देशप्रेम #हिंदुस्तान #सुरक्षितभारत

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काम पर जाने वाली औरत-संगीता सहाय

संगीता सहाय.

पुलिस कालोनी, B – 175

अनीसाबाद, पटना बिहार

मोबाईल नंबर – 9905400867.

Email id ; sangitasahay111@gmail.com

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पुरूषोत्तम व्यास की कविताएँ

पुरूषोत्तम व्यास

C/o घनश्याम व्यास

एल.जी 63 नानक बगीचे के पास

शांतीनगर कालोनी

नागपुर(महाराष्ट)

ई-मेल pur_vyas007@yahoo.com

मो. न. 8087452426

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जीवन संगिनी

  1. जीवन संगिनी है तो संसार सुंदर है, वरना सब वीरान है।

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दयानंद कनकदंडे जी की अनुदित कविताएँ-अनुवाद :प्रेरणा उबाळे

मराठी के लेखक, समीक्षक, कवि एवं “सगुणा” पत्रिका के संपादक दयानंद कनकदंडे जी एक जीवनदानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं l सामाजिक तथा अन्य विषयों पर उनका लेखन और अनुवाद अनेक मराठी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ है l

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