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विश्वास (कहानी)

*विश्वास* ( कहानी) 'प्लीज मम्मी ..'.. 'कोई प्लीज- ब्लीज नहीं ! आज तो तुम्हें सबक सिखा कर ही दम लूंगी |' सारिका ने अपने इकलौते बेटे आयुष को...

हिंदी रिपोर्ताज साहित्य और कन्हैयालाल मिश्र का ‘क्षण बोले कण मुस्काए’

रिपोर्ताज साहित्य की गणना हिंदी गद्य की नव्यतम विधाओं में की जाती है. द्वितीय विश्वयुद्ध के आसपास इस विधा का जन्म हुआ. रिपोर्ताज शब्द को अपने विदेशी (फ्रेंच) रूप में ही ज्यों का त्यों हिंदी में अपना लिया गया

कहानी-ज्यों चकमक में आग: शिवानी

कहानी- गैंदी की पनीली आँखों में हृदय में संचित स्मृतियों की परछाइयाँ चहल-कदमी करने लगीं। बंद आँखों के आगे कुछ मंज़र घूम रहे थे।

कवि केदारनाथ अग्रवाल की कविताओं में प्रकृति-बोध का आधुनिक सन्दर्भ

कवि केदारनाथ अग्रवाल का प्रगतिशील कवियों में महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। उनकी कविता ग्रामीण परिवेश एवं जनजीवन को मानवीय आधार प्रदान करती नज़र आती है।

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रिपोर्ताज साहित्य की गणना हिंदी गद्य की नव्यतम विधाओं में की जाती है. द्वितीय विश्वयुद्ध के आसपास इस विधा का जन्म हुआ. रिपोर्ताज शब्द को अपने विदेशी (फ्रेंच) रूप में ही ज्यों का त्यों हिंदी में अपना लिया गया

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21वीं शताब्दी में सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में एक नई अवधारणा का विकास हुआ जिसे विश्वविद्यालय सामाजिक उत्तरदायित्व के नाम से जाना गया।
इस आलेख में फुटपाथ दुकानदार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के विषय मे अध्ययन करने का प्रयास किया गया है।

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