अमेरिका के पूर्व राष्ट्र्पति अब्राहम लिंकन ने एक बार पाखंडी शब्द को परिभाषित करते हुए कहा था – “यह मुझे उस व्यक्ति की याद दिलाता है जो अपने माता पिता का वध करने के बाद अदालत में यह कहकर दया की भीख माँगता है कि वह अनाथ है ।” कुछ यही हाल आज हमारा है हम वर्षों से पर्यावरण की निर्मम हत्या करते हुए  अब भगवान से हमें विष कूप से बाहर निकालने की प्रार्थना कर रहे हैं जो हमने तथाकथित विकास के नाम पर अपने लिए स्वयं तैयार किया है । हमारा साँसे आज सुरक्षित नहीं हैं । पर्यावरण के निरंतर ह्वास की चिंता भी बहुत पुरानी है किंतु इस विषय में गोष्ठियों, भाषणो अथवा कहीं कही  यदा क्दा किए गए छुट मुट प्रयासों से अधिक कुछ विशेष नहीं हुआ है हाँ चिंता के उद्‍घोष  में बुलंदी अवश्य आई है ।
आज से 49 वर्ष पहले स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा पर्यावरण और प्रदूषण पर पहला अंतराष्ट्रीय सम्मेलन 5 जून से 16 जून तक आयोजित किया गया था इसी सम्मेलन में , जिसमें 119 देशों ने भाग लिया था  , संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का गठन किया गया था जिसका नारा  था- “केवल एक पृथ्वी”। तभी से हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष नए थीम के साथ  मनाया जाता है ।  2018, 2019 , 2020  में यह  थीम्स क्रमशः इस प्रकार  थी -बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन, वायु प्रदूषण एवं जैव विविधता ।
इस वर्ष अर्थात 2021 में ,शायद कोरोना महामारी में पर्यावरण असंतुलता का भारी योगदान देखते हुए, थीम है ‘Ecosystem Restoration’  यानि जिसका पारिस्थितिक तंत्र  की पुनर्बहाली । इस थीम का उद्देश्य है – नष्ट प्रायः हो चुके पारिस्थितिक तंत्र को  पुनर्जीवित करने का यथा संभव प्रयास करना तथा  उन पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण करना ,जो  अभी बरकरार हैं, किंतु जिन्हे अत्यंत देखभाल की आवश्यकता है । पर्यावरण के प्रति हर व्यक्ति का सजग होना अत्यंत आवश्यक है । बाढ़, भूकम्प, भूस्खलन आदि आपदाओं की तीव्रता कम करने के लिए वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करना सभी का कर्तव्य है तभी हम भावी पीढी को अच्छा पर्यावरण धरोहर के रूप में सौंप सकते हैं ।
लिए कुल्हाड़ी हाथ में, आया अंध विकास
बिन देर कर बिछा गया, शत वृक्षों की लाश ,
वृक्षों की रक्षा करें , नई लगाएं पौध 
तब ही निकट भविष्य में, ले पाएंगे श्वास !!
-ओंम प्रकाश नौटियाल
https://www.amazon.in/s?k=om+prakash+nautiyal
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