हमसफ़र
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अपना हाथ तेरे हाथ में दें रही
थाम तो लोगे न?

मजबूती से पकड़ कर रखोगे
साथ छोड़ोगे तो नहीं न?

पूरी खुशियाँ तुझ पर लुटा दूंगी
मुझे गम तो नहीं दोगे न?

कदम से कदम मिलाकर चलने की बात करते होl
मुसीबत में पीछे नहीं हटोगे न?

माँ-पिता, भाई-बहन, दोस्तों को छोड़ कर आउंगीl
सबका किरदार निभा पाओगे न?

मेरी गलती पर डांटकर नहीं
प्यार से समझाओगे न?

सीता की तरह तुम्हें पूजूंगीl
राम की तरह पत्नीव्रता धर्म निभाओगे न?

मन में डर है, तेरे दर पर कैसे आऊंगीl
मेरे डर पर काबू करके गृहप्रवेश करवा दोगे न?
-ट्विंकल वर्मा, आसनसोल(प,बं)

Sending
User Review
( votes)
यह भी पढ़ें -  लक्ष्मीकांत मुकुल

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.