मां तेरे वात्सल्य का भण्डार यदि कुछ शेष है
दे दिया उसको जो तेरे निकट व विशेश है
मैं अधम अती नीच पापी फिर भी तेरा दास हूं
दूर करती हौ परंतु फिर भी तेरे पास हूं
मैं तो मर्यादा निभाया पुरुष उत्तम हूं नहीं
तूं तो सबकी मात तुझसे पूछ लूं मैं क्यूं नहीं
पूत मैं तो कुपूत हूं पर मां तूं मेरी मात है
राह में सबके उजाला क्यों ये मेरी रात है
किसने कितना क्या किया माता मुझे बतलाईये
बिखर जाऊंगा मेरी मां और ना तडपाइए

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