ओमप्रकाश भारतीय उर्फ़ पलटू जी शहर के सबसे बड़े उद्योगपति होने के साथ ही फ़ेमस डॉग लवर अर्थात् प्रसिद्ध कुत्ता प्रेमी भी थे। पलटू जी ने लगभग सभी नस्ल के कुत्ते पाल रखे थे। उन्हें कुत्तों से इतना प्रेम था कि कुत्तों के मल-मूत्र भी वे स्वयं साफ़ किया करते थे। उनके श्वान प्रेम पर अख़बार एवं पत्रिकाओं में सैकड़ों लेख प्रकाशित हो चुके थे।

क़रीब एक दर्जन नौकर पलटू जी के यहाँ काम करते थे। लेकिन मोहन मुख्य नौकर था। तबीयत ठीक ना होने की वज़ह से आज मोहन ने अपनी जगह अपनी पत्नी मालती को काम पर भेजा था। मालती अपने साथ अपने ढाई वर्षीय बेटे को साथ लेकर पलटू जी के यहाँ काम करने आ गयी। भोजन कक्ष के फर्श पर अपने बेटे को बिठाकर मालती अपना काम करने लगी। दो घंटे बीत गये। उधर मालती अपने काम में मशग़ूल थी और इधर उसका बेटा खेलते-खेलते पलटू जी के शयनकक्ष में जा पहुँचा और उनके बिस्तर पर खेलने लगा। उस समय पलटू जी अपनी बालकनी में बैठकर कुकुर प्रेम पर कविता लिख रहे थे। अपनी कविता पूरी करने के पश्चात जब वो अपने शयनकक्ष में पहुँचे तो उन्होंने देखा कि मालती का बेटा उनके बिस्तर पर मल त्याग कर रहा था। तब तक मालती भी अपने बेटे को ढूँढ़ते हुए पलटू जी के शयनकक्ष तक पहुँच चुकी थी। बिस्तर पर मल त्याग करता हुआ देखकर पलटू जी आग बबूला हो गये और भारत में औरतों को दी जाने वाली सारी गालियाँ कुछ ही पलों में मालती को दे डालीं। तब तक मालती डर के मारे अपने बेटे को अपनी पीठ पर लादकर अपने हाथों से मल को उठा चुकी थी। अपने शब्दकोश की सारी गालियाँ दे डालने के पश्चात पलटू जी ने मालती को तुरंत घर से निकल जाने का आदेश दे डाला और साथ ही मोहन को काम से निकाले जाने का फ़रमान जारी कर दिया।

अगले दिन सुबह मोहन काम की तलाश में निकल पड़ा। इधर पलटू जी अपनी बालकनी में बैठकर अख़बार में छपी कुकुर प्रेम पर लिखी गई अपनी कविता को देखकर मुस्कुरा रहे थे।

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✍️ आलोक कौशिक

(साहित्यकार एवं पत्रकार)

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