जनता-कर्फ्यू
पात्र
माँ
पुंडू (10 -12 वर्ष का एक बालक)
(मंच सज्जा : ड्राइंग रूम का दृश्य : एक सोफे पर बैठी माँ, सामने रखी सेंटर-टेबल पर बिछे अख़बार पर फैला कर रखी सब्जियों को साफ़ कर रही है. बीच बीच में सोफे पर रखा मोबाईल उठाकर उसको ऐसे देखती है मानों किसी के व्हाट्स-अप संदेश पढ़ रही हो. तभी मंच पर पुंडू आता है. उसके हाथ में क्रिकेट खेलने का बैट है, जिससे वह हवा में ही किसी अदृश्य गेंद को मारने का अभ्यास कर रहा है.)
पुंडू : माँ! आज मेरी छुट्टी है.
माँ : हाँ बेटा! आज सबकी छुट्टी है.
पुंडू : पापा की भी ?
माँ : हाँ..
पुंडू : पर पापा तो रोज ऑफिस जाते हैं.
माँ : पर अब सब अपने घर पर रहेंगे.
पुंडू : वाह ! तब तो मजा आ जायेगा. अभी तो मैं अपने दोस्तों के साथ खेलने बाहर जा रहा हूँ.
( कहकर पुंडू बाहर जाने को उद्धत होता है . माँ उसे जाने से रोकने के लिए कहती है.)
माँ : नहीं ! आज घर पर ही खेलो.
(पुंडू थोड़ा ठहरकर)
पुंडू : मैं अभी आ ही रहा हूँ. बस, थोड़ी देर राहुल के साथ क्रिकेट खेलने के बाद सीधा घर आ जाऊँगा.
(कहकर पुंडू फिर बाहर जाने लगता है, मगर माँ फिर उसे जाने से मना कर देती है.)
माँ : नहीं बेटा! आज घर से बाहर नहीं जाना..
पुंडू : मगर क्यों… आज तो छुट्टी है ना..
माँ : छुट्टी तो है मगर फिर भी…
पुंडू : फिर क्यों ?
(कहते हुए पुंडू अपनी माँ के पास ही सोफे पर बैठ जाता है.)
माँ : क्योंकि आज जनता-कर्फ्यू है .
पुंडू : जनता-कर्फ्यू … मतलब..
माँ : तुम्हें पता है अभी एक बीमारी पूरी दुनिया में फैली हुई है..
पुंडू : हाँ, वो तो मुझे पता है..
माँ : क्या नाम है उसका ..
पुंडू : कोरोना ..कोरोना नाम है …रोज तो टीवी पर आता है…
माँ : ये कोरोना बड़ी खतरनाक बीमारी है.
पुंडू : हाँ, यह तो हमारे सर भी बता रहे थे.
माँ : क्या बताया है सर ने …
पुंडू : वो बता रहे थे कि यह बीमारी चीन की वुहान नामक जगह के बहुत से लोगों को मारने के बाद धीरे-धीरे पूरी दुनिया में पहुँच गयी है.
माँ : बिल्कुल ठीक ! सही कहा तुम्हारे सर ने..
पुंडू : हाँ , सर कह रहे थे कि जब तक कोरोना रहेगा, तुम्हारी छुट्टी है..
माँ : अच्छा ! तुम ही बताओ, कोई बीमार होता है तो छुट्टी कौन लेता है ?
पुंडू : जो बीमार होता है..
माँ : और बाकी लोग ?
पुंडू : वो तो स्कूल आते हैं…
माँ : फिर तुम्हारी छुट्टी क्यों की गई ?
पुंडू : ये तो मुझे नहीं पता..
माँ : इसलिए कि जो स्वस्थ हैं वे बीमार न् पड़ें..
पुंडू : अच्छा मम्मी, अभी तो मैं खेल के आता हूँ , फिर सारी बातें सुनूंगा ..
(कहकर पुंडू एक बार फिर बाहर जाने के लिए सोफे से उठने लगता है तो उसकी माँ उसका हाथ पकड़ कर उसे फिर सोफे पर बिठा देती है.)
माँ : नहीं ! बताया तो है कि जनता-कर्फ्यू है…
पुंडू : फिर वही जनता-कर्फ्यू ? ये है क्या ?
माँ : कोरोना जैसी भयानक बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे में न फैले, इसके लिए हर व्यक्ति का एक दूसरे से दूर रहना बहुत जरूरी है. हम सब लोग अपने-अपने घरों में रहकर बीमारी को फैलने से रोकेंगे.
पुंडू : पर मम्मी ! मेरा दोस्त तो बिल्कुल ठीक है. उसके साथ खेलने से मैं बीमार नहीं हो सकता.
माँ : तुम्हारी बात ठीक है पर यह जो कोरोना है ना, इसके वायरस बहुत ही जिद्दी किस्म के हैं. यह किसी भी वस्तु पर पहुँच जाते हैं तो वहाँ 10-12 घंटे तक जिंदा रह सकते हैं और उस जगह को जरा सा भी छू लेने वाले व्यक्ति को भी यह बीमार कर सकते हैं. लेकिन 12 घंटे तक कोई जीवित प्राणी इन्हें न् छुए तो यह वायरस स्वयं ही खत्म हो जाता है.
पुंडू : तो मम्मी मैं तो बाहर बस खेलूँगा. किसी और चीज को मैं बिल्कुल भी नहीं छुऊँगा…
(पुंडू फिर से उठने का उपक्रम करता है. इस बार माँ उसका क्रिकेट-बैट उससे लेकर सोफे के किनारे रख देती है.)
मम्मी : नहीं ! गार्डन में, पार्क की बेंच, दरवाजे, फेंसिंग और रेलिंग में कहीं भी यह वायरस हुआ तो वहाँ जाने वालों के साथ उनके घर जा सकता है. इसीलिए तो सबने मिलकर निश्चय किया है कि सब 14 घंटे तक अपने घरों में ही रहेंगे. अपने-आप सारी जनता का अपने घरों में बन्द रहना ही जनता-कर्फ्यू है.
पुंडू : अब मैं सब समझ गया. मैं अपने दोस्तों को अभी फोन करता हूँ….
(पुंडू मम्मी के पास रखा मोबाईल उठा लेता है.)
माँ : किसलिए…
पुंडू : उन्हें भी घर पर रहकर जनता-कर्फ्यू को सफल बनाना होगा.
(सभी दर्शकों को संबोधित करते हुए पुंडू हाथ की मुट्ठी बंधकर हवा में लहराते हुए नारा लगता है.)
कोरोना तब नहीं रहेगा जब बच्चे खेलें घर के भीतर .
जनता-कर्फ्यू के प्रभाव से भाग जाये कोरोना डरकर …
(पुंडू फोन पर नंबर मिलाने लगता है, और पर्दा गिर जाता है.)

गंगा धर शर्मा ‘हिन्दुस्तान’
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