किसान हमारी आन बान शान
इनसे ही है सुरक्षित हिंदुस्तान

(शीर्षक)

‘कृषक देव’ हम सुरक्षित हैं
जब तक तुम्हारा सरमाया है
हर विपत्ति में हर मौसम में
तुमने ही हमें बचाया है !
विश्व युद्ध काल ने दुनियाँ
की आजीविका लूटी थी
तुमसे हमारी उम्मीद उस
हाल में भी न टूटी थी !
सन 1997 का वो
दुर्गम दौर भी हमने देखा था
बाहरी चमक दिखावा था
बस नज़र का धोखा था !
दहाड़ते एशियाई शेर सभी
मुँह के बल गिरे थे
सब एक सरताज के आगे
हाथ जोड़े खड़े थे !
तब तुमने हमें बचाया था
तुमने ही पार लगाया था।
इस कोरोना काल में
जो दुरूह विपत्ति आयी है
तुमने ही हम सबकी कश्ती
फिर से पार लगाई है!
जी-तोड़ मेहनत करके
तुम पेट हमारा भरते हो
कपास उगाकर खेतों में
तुम तन को हमारे ढकते हो!
अपने बेटों को देश पर
निसंकोच न्यौछावर किया
हमें सुरक्षित रखने को
दुश्मनों की फ़ौज से लड़ते हो!
अच्छी फसल हमें सौंपकर
जो बचे वही खुद खाते हो !
हमें पूरी कपास देकर
ख़ुद फटेहाल रह जाते हो !
तुम्हारी ताकत और हिम्मत
को तहे दिल से नमन है
कैसे बेटों के बलिदान पर
चुपचाप अश्रु बहाते हो !
तुम थाती हो, सम्पति हो
और गर्व हो हिंदुस्तान का
पीढ़ियाँ शुक्र करेंगीं हरदम
तुम्हारे हर बलिदान का !!

©’शशि’ सर्वाधिकार सुरक्षित

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