काश !!!

शब्द नहीं मिलते ,
इसलिए नहीं बोलूँगा
मैं न कहूँगा ……..
दर्द सच है !
जैसे उसने किया ,
त्याग दिया …….
जैसे बसंत से पूर्व प्रकृति त्यागती है,
अपना सौन्दर्य…..
लेकिन जीवन की अनन्तता तक |
रहोगे, मेरे हृदय में |
अक्सर सोचते है
काश !!!!!
वो पहले मिले होते
रोक लेता उन्हें,
समर्पित कर ख़ुद को |
जैसे पुष्प समर्पित होते है
ईश्वर में ……….
दूर हो, बेशक़ दूर हो
समझ लेना हृदय के उद्गार ।
#आर. पी. शुक्ला
9936444618
दिनांक १ मई २०२०

Sending
User Review
( votes)
यह भी पढ़ें -  अजन्मा प्रतिकार

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.