ऑफिस अब सब्जेक्ट टू मार्केट नहीं, सब्जेक्ट टू होम बन चुका था | कनिका की शिकायतें जब से कोरेंटीन हुईं तब से चाय के प्लाये टूटने पर, बेटियों को होमवर्क, कुत्ते को घुमाने, डस्टिंग-मोपिंग, सब्ज़ी काटने, कूड़ा फैंकने जैसे मुद्दों पर पति से माथापच्ची करने लगी थीं |

आज सुबह से दोनों पति-पत्नी अपना-अपना ऑफिस खोले, वर्क-मोर्चे पर डटे थे और बेटियाँ पढ़ाई पर | घर शान्ति के कब्ज़े में था लेकिन शांति के दामन पर टपकतीं आरो की बूँदें नगाड़े पर चोट-सी पड़ रही थीं | तंग आकर पति ने आदेश दिया-“ कनिका अपने आरो को शांत कराओ, नहीं तो मैं इसे अभी फेंक दूँगा |”

“नहीं नहीं कुंदन प्यारे, हम प्यासे मर जायेंगे…|” कहते हुए पति के आदेश को समेटकर उसने बच्चों की ओर उछाल दिया | आदेश सीधे बड़ी बेटी की किताब पर औंधे मुँह जाकर गिरा |

अचानक हुए धमाके से पहले तो वह डरी लेकिन तुरंत ही उसने उसे कनू के ओर फेंक दिया | कनू तक पहुँचते-पहुँचते आदेश गेंद की तरह गोल बन चुका था इसलिए कनू ने रंग सनी तूलिका घुमा, छक्का लगा दिया और हिप-हिप हुर्रे कर नाचने लगी |

कविता ने उसको नाचते हुए देखा तो उसकी चोटी खींचते हुए कहा-“मैडम कनू किशोर ज्यादा खुशियाँ मत मना, तू आउट हो चुकी हैं | अब जा, महारानी कविता किशोर के आदेश का पालन कर |”

इधर जब बहुत देर तक बच्चे नहीं बोले तो कनिका ने आव़ाज लगाई-“क्या हुआ कविता, सुना नहीं, पापा क्या कह रहे हैं ?”

दोनों बहनों में तू जा मैं जा के झगड़े शुरू हो चुके थे बच्चों का रिस्पॉन्स न पाकर और उनका काम निपटने को था , कनिका ने पति से कहा -“कुंदन, चलो थोड़ी देर रेस्ट लेते हैं|” कहते हुए दोनों बच्चों की ओर गए |

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“आइये पापा जी! कनू जा रही है अभी |” बड़ी बेटी ने कॉपी-किताबें ठीक करते हुए पिता के बैठने की जगह बनाई |

“हाँ हाँ ठीक है बेटा ! क्या आप पापा को कॉफी पिलाओगी ?”

“जी पापा, आप बैठिए, हम अभी लाते हैं |” कविता कहते हुए किचन की ओर चली गई |

कुंदन ने फ्रंट विंडो खोलते हुए पत्नी से कहा-“ देखो न कनिका, जो तितलियाँ सहमीं-सहमीं रहती थीं आज वे आज़ादी की उड़ान भर रही हैं |कितना सुनहरा दिन है |”

कनिका कुछ कह पाती, उसकी लाड़ली बेटी कनू अपने पापा को कॉफ़ी मग पकड़ाते हुए बोल पड़ी- “पापा जी ये तितलियाँ नहीं उनके सिर्फ़ सपने हैं, वे तो अभी भी कैद में हैं |” कुंदन का पूरा ध्यान बेटी की बात पर टिक गया|

“हाँ, पापा जी, कनू सही कह रही है | तितलियों को आज़ाद कराने के लिए कोरोना को एक नहीं, कई जन्म और लेने पड़ेंगे |” दोनों बहनें हाथों को फैलाकर तितलियों की नक़ल करने लगीं |

बेटियों के रँग देख कुंदन के चेहरे का रँग फ़ीका पड़ गया लेकिन कनिका को मुस्कुराने का अवसर मिल गया था।

कल्पना मनोरमा
31 .5.2020

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