१.बाजू भरी किताब हो, या कांटो वाले गुलाब
मतला हो मीर का,या गालिब सा अन्दाज
गुल-ए-शुर्ख हो या
गुलाबी-किताब ……..(उन्मान)

कुछ पढे़ लिखे लोग कहते है
कि मोहब्बत में गुलाब नही, किताब देते है
हम ठहरे गवॉर नसमझ लोग
किताबो में भी गुलाब देते है
तुम इन्कार करते हो मोहब्बत गुलाब वाली
हमने तो बचपन से की थी मोहब्बत किताब वाली
मेरा गुलाब तो दबा हुआ था, तेरी किताब में
तू ठहरा मुन्सिफ, कहा आता तेरी हिसाब में
उसे डर था मेरे ख्याल का
तो निकालकर कही फेक दिया होगा
बेशक मेरी मोहब्बत की तरह
उसने भी कही दम तोड़ दिया होगा
फिर भी इक निशान छोड़ा उसने,
मोहब्बत अब भी थी उस गुलाब में
पन्ने पीले पड़ गए थे फिर भी
इश्क जिन्दा था उस गुलाबी-किताब में……

Uddeshgondwi
२. यह महफूज जो अब भी है मेरा दिल
किसी की याद है इसमें
वगरना हम अकेले होते न जाने किस-किस के हुए होते
मेरा बिस्तर अभी वही है
तुम्हारी यादों और हमारे ख्वाबों वाला
नहीं तो हम न जाने किसके साथ न जाने कहां कहां सोए होते
तब तो तुम्हारी याद से हर पहर मालूम होता था मुझे
हम वक्त के साथ होते तो न जाने कहां कहां खोए होते
कोई इरादा भी नहीं था तब तुझे लिखने का हम शायर होते तो कातिल बेशक नहीं होते…..

३.
जब अब भी
तेरी रगों में यार है तुम्हारा
तो मुझको अपने दिल में क्यों ला रहे हो तुम
जब तेरी सांसे रुके
तो उर्फ खुद-ब-खुद बयां हो जाएगा
जब तलक जिंदा हो
तो क्यों छुपा रहे हो तुम
मुझको क्या समझाते हो
खुद को ही बहलाओ
मुझे तजुर्बा है मुझको क्यों बता रहे हो तुम
किसी से जिस्म
किसी से दिल
वाली मोहब्बत करते हो तुम
सौदा करके इसको बाजार क्यों बना रहे हो तुम

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४.
जिंदगी कुछ इस तरह से गुजर रही है मेरी
न गुजर है तेरी ना गुजर है मेरी
आज बहुत गुरूर है तुझको जिस जिस्म की चादर पर
कभी रह गुजर थी मेरी अब रह गुजर है तेरी
उसकी आंखों से दुनिया कितनी भी देखो
जो नजर है तेरी कभी वह नजर थी मेरी
मासूम तो मैं भी बहुत था लुट तुम भी जाओगे
दिल ए नादा़न जो खबर है तेरी वह खबर थी मेरी
थोड़ा निभा लो तो बेशक देखो सपने उसके
पर वह न कभी थी मेरी न कभी है तेरी।
५.
थोड़ा सोचो वह एहसास कैसा होता होगा
जब कोई सपना इलाहाबाद से वापस होता होगा
आज की सुबह में एक अंधेरी रात होगी
दिन जरूर होगा पर कुछ अलग ही बात होगी
आज की रात बड़ी गहरी थी
वह गांव का था और यादें सारी शहरी थी
कुछ साल पहले बड़ी उम्मीदे लेकर वह इलाहाबाद आया था
उम्र के साथ सारे attempt भी खत्म हो चुके थे पर सिलेक्शन नहीं हो पाया था
यहां आना जितना सुखद था
यहां से जाना उतना ही दुखद था
मेरी असफलता से मेरी तपस्या तो धुंधली पड़ चुकी थी
ठोकरें इतनी लगी की अब आदत सी पड़ चुकी थी
पहले ही प्रयास में ही आईएस बनूंगा ऐसा बाबूजी को जो बतलाया था
वह ऐसा पहला बेटा ना था हर लड़का तो यही बता कर आया था
मेरे जैसे यहां तो लाखों हैं जो निपट अकेले रोते थे
सारे सपने टूट रहे थे वह पता नहीं कब सोते थे
कुछ के सपने पूरे हुए थे बहुतों को वापस जाना था
भारत माता की बहुत से बेटों को अब भी धैर्य दिखाना था
मैं बहुत मायूस होकर लौट रहा था जब यहां से
कई सपने आ रहे थे मैं आया था जहां से
ट्रेन तो रोज चलती है कुछ सपने भी आते जाते हैं
कुछ को मिली बुलंदी तो कुछ लाल टूट कर जाते हैं

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६.
वह वक्त कुछ और हुआ करता था
और अब खामोश जवानी हूं मैं
अब मोहब्बत की बस दो-चार कहानी हूं मैं
मुझको मुझसे अब कोई मोहब्बत नहीं
ऐ मेरी पहली मोहब्बत मैं तेरी पहली मोहब्बत नहीं
तू अंकुर है मोहब्बत में
मैं मोहब्बत में सज़र सा हूं
तू घायल है मोहब्बत में
मैं मोहब्बत में नजर सा हूं
हम बेशक कत्ल नहीं करने आए थे
पर वफा भी कितनों से करते
सादगी मेरी थी और जिस्म तुम्हारा था
हम बेशक इश्क नहीं करने आए थे
अब तो कारोबार करता हूं इश्क के नाम पर
गमों में तरक्की होती है इश्क के जाम पर
अब अगर तोहमत लगाऊं
तो उस पर भी यह कोई इल्जाम होगा
मैं तो अदना सा एक शायर हूं
कहूंगा तो थोड़ा बदनाम होगा।
७.
कि अब मकसद नहीं है तू मेरा
मैंने मंजिल बदल ली है
और हो सके तो माफ करना मुझे
बिना इजाजत के मैंने तुझ पर एक ग़ज़ल की है
कुछ यू उकेरा है मैंने जज्बातों को पन्नों पर
कि जख्म और गहरा बन गया
नज़म पर अब आखरी अल्फाज था मेरा
और पन्ने पर तेरा चेहरा बन गया
पढ़कर मेरे अल्फाजों को कहता है वह
कि इसका गुनहगार तू है
अब मैं कैसे कहूं कि मैं लिख पाता हूं कुछ भी
उसकी हकदार तू है
जो थोड़ी सी मोहब्बत की थी थोड़ा और सितम दे देती
मैं थोड़ा और शायर बन जाता जो थोड़ा और जख्म दे देती।

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